कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच जारी विवाद अब और गहरा गया है। प्रियांक खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा और आरएसएस को निशाने पर लिया है। उन्होंने भाजपा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हाथ की कठपुतली बताया है। इस पूरे मामले को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने राजनीतिक नाटक करार दिया है।
खरगे ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि जब भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से कोई सवाल पूछा जाता है, तो भाजपा तड़प उठती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी कोई संघ की जवाबदेही पर बात करता है, तो भाजपा अपना आपा खो देती है। खरगे के मुताबिक, भाजपा हमेशा से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की केवल एक सहयोगी नहीं रही है, बल्कि यह उसका एक जरिया यानी टूल रही है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि भाजपा का हर पलटवार सिर्फ यही साबित करता है कि असली कमान किसके हाथों में है।
अपने हमले को आगे बढ़ाते हुए कर्नाटक के गृह मंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि जिस संगठन ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं दिया, वह आज पूरे देश को देशभक्ति पर लेक्चर क्यों दे रहा है? इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने में 52 साल का लंबा वक्त क्यों लग गया था? प्रियांक खरगे यहीं नहीं रुके। उन्होंने यह भी सवाल किया कि संघ वास्तव में बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान को मानता है या फिर उस संविधान को जिसे वे खुद लिखना चाहते थे?
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखा था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने अस्तित्व के 100 साल पूरे करने जा रहा है। इसी मौके पर खरगे ने संगठन की कानूनी स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही पर सफाई मांगी थी। उनका कहना था कि जिस संगठन की देश-विदेश में 60000 से ज्यादा शाखाएं और करोड़ों स्वयंसेवक हैं, उसे पारदर्शिता और टैक्स नियमों का पूरी तरह पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि बिना किसी औपचारिक रजिस्ट्रेशन के इतनी बड़ी गतिविधियां किस कानूनी आधार पर चल रही हैं?
मोहन भागवत ने खरगे के आरोपों को किया खारिज
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा ने प्रियांक खरगे के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने खरगे के सवालों को ‘राजनीतिक स्टंट’ बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पत्र का जवाब देने की कोई जरूरत नहीं लगती। वहीं, भाजपा के लोकसभा सांसद रमेश जिगाजिनागी ने चेतावनी भरे लहजे में बयान दिया। उन्होंने कहा कि जिसने भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को छूने की कोशिश की है, वह बच नहीं पाया है। इस चेतावनी पर प्रियांक खरगे ने पलटवार किया। उन्होंने पूछा कि क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई आतंकवादी संगठन है जो सवाल उठाने वालों को खत्म कर देता है? खरगे ने कहा कि वे बाबासाहेब की विचारधारा के अनुयायी हैं और ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।






