उपभोक्ताओं को अंगूठे के निशान से राशन वितरण, कांग्रेस सहित विक्रेताओं ने किया विरोध

उपभोक्ताओं को अंगूठे के निशान से राशन वितरण, कांग्रेस सहित विक्रेताओं ने किया विरोध

बुरहानपुर।शेख रईस

कोरोना महामारी(corona pandemic) से बचाव के लिए जहाँ शासन प्रशासन सहित आम जनमानस भी प्रयास रत है। हाल ही में मध्यप्रदेश सरकार(madhyapradesh government) ने एक आदेश जारी कर ग्रीन जोन(green zone) वाले जिले में राशन वितरण प्रणाली में अब हितग्राहियों को थंब (अंगूठे) के निशान लेना कि पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू करना होगा। जिसके विरोध में आज बुरहानपुर(burhanpur) जिले के राशन विक्रेताओं ने अपना विरोध दर्ज करते हुए ज्ञापन सौंपा खाद्यय अधिकारी से इस व्यवस्था को अभी लागू नही करने की बात कही राशन विक्रेताओं का कहना है कि कोरोना सक्रमण के कारण हम भी अपनी जान जोखिम में नही डालना चाहते क्योकि एक ही मशीन(machine) पर हर हितग्राही के निशान लेते वक्त यदि कोई संक्रमित व्यक्ति के सपंर्क में आने जान का झोखीम बढ़ सकता है। इसीलिए इस व्यवस्था को कुछ समय के लिए स्थगित किया जाना चाहिए।

उधर कोंग्रेस जिलाध्यक्ष अजय रघुवंशी ने कहा कि लॉक डाउन के कारण घर मे बन्द आम जनता वैसे ही परेशान है इस पर सरकार केवल उनकी भावना से खिलवाड़ करने में लगी है। अजय रघुवंशी ने शिवराज(shivraj) सरकार पर आरोप लगते हुए कहा कि थंब(thumb) लगने के सरकार के आदेश से पूरे प्रदेश में सक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। रघुवंशी ने मुख्यमंत्री(chiefminister) से ऐसे फैसले लेने से पूर्व उसके परिणामों पर विचार करने की सलाह दी और तत्काल इस निर्णय को जनहित में वापस लेने की मांग की।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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