उपचुनाव की जंग: प्रचार का शोर थमा, बयानों की बौछार जारी

उपचुनाव की जंग: प्रचार का शोर थमा, बयानों की बौछार जारी

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश (MadhyaPradesh) की 28 सीटों के उपचुनाव (Byelection) में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) और पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamalnath) के बीच तीखी बयानबाजी जमकर देखने को मिली| प्रचार का शोर थम गया है, लेकिन एक दूसरे पर तीखी टिप्पणियां जारी है| मतदान (Voting) के एक दिन पहले शिवराज फिर कमलनाथ पर जमकर बरसे|

पत्रकारों से चर्चा करते हुए सीएम शिवराज ने कहा कमलनाथ ने मध्य प्रदेश को तबाह और बर्बाद कर दिया, विकास के काम ठप कर दिए, सवा साल में विकास के लिए सवा रुपए नहीं दिया, विजन की नहीं कमीशन की सरकार कमलनाथ ने चलाई, वाडे पूरे नहीं किये, योजनाएं बंद कर दी, जनता का जीना दूभर कर दिया, ऐसी कांग्रेस को करारी शिकस्त मिलेगी|

शिवराज ने कहा कमलनाथ जी पूछते हैं कि मैंने क्या पाप किया, कमलनाथ जी, आपने सभी जनकल्याणकारी योजनाएँ बंद कर दी, किसानों से कर्ज़माफी का झूठा वादा कर उन्हें डिफॉल्टर बना दिया, बेटियों से कन्यादान की राशि छीन ली, विद्यार्थियों से लैपटॉप और छात्रवृत्ति छीन ली, यही तो आपके पाप हैं| शिवराज ने कहा कांग्रेस के नेताओं ने मुझे तो अपशब्द बोले ही, मुझे नालायक कहा, शाहरुख सलमान से बड़ा कलाकार बताया, घुटनेटेक कहा, एक महिला मंत्री के लिए उनके प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने तक अपशब्द का इस्तेमाल किया। उसके बाद बेशर्मी से से अपना बचाव भी किया। मध्यप्रदेश की जनता माँ, बहन और बेटी का अपमान कतई सहन नहीं कर सकती|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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