कांग्रेस पर शिवराज का हमला, पाखंड बंद करे और सत्य स्वीकारे, हमारे लिए अन्नदाता ही भगवान

कांग्रेस पर शिवराज का हमला, पाखंड बंद करे और सत्य स्वीकारे, हमारे लिए अन्नदाता ही भगवान

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| केंद्र सरकार के नए कृषि कानून (Farmer Law) के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन (Farmers Protest) को लेकर भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच बयानों को जंग जारी है| अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh CHauhan) ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पाखंड बंद करे और सत्य स्वीकारे| कांग्रेस को शर्म आनी चाहिए कि उसने सदैव केवल किसानों के नाम पर राजनीति की और अब भी वही कर रही है|

दरअसल, कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के ट्वीट पर शिवराज ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला है| सीएम शिवराज ने ट्वीट कर लिखा- कांग्रेस के मित्र सुन लें कि यह मध्य प्रदेश है, यहां किसानों का हित करने वाली सरकार है और हमारे लिए अन्नदाता ही भगवान हैं।मैं कांग्रेस के मित्रों को बताना चाहूंगा कि प्रदेश की मंडियों में अक्टूबर 2020 में गत वर्ष की तुलना में 20.65% अधिक अनाज की खरीदी की गई है।

शिवराज ने आगे लिखा- ‘कांग्रेस को शर्म आनी चाहिए कि उसने सदैव केवल किसानों के नाम पर राजनीति की, उन्हें छला, धोखा दिया और और आज भी वही कर रही है। देश में नया कृषि कानून आने के बाद किसानों की समृद्धि के लिए नये द्वार खुल गये हैं। किसानों की आय दोगुनी होगी और उनकी समृद्धि से देश सशक्त होगा’। ‘कांग्रेस पाखंड बंद करे और सत्य स्वीकारे। कांग्रेसी अपनी आंखें खुली रखें, तो उन्हें भी नये कृषि कानून का लाभ दिखाई देने लगेगा। होशंगाबाद के किसान नये कृषि कानून से होने वाले लाभ का जीवंत उदाहरण हैं। मंडी से बाहर बिक्री हुई और समस्या होने पर तत्काल निराकरण भी हो गया’।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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