107 दिन बाद आज से खुला सिंगाजी धाम, आधारकार्ड और मास्क के बगैर नही मिलेगा मंदिर में प्रवेश

107 दिन बाद आज से खुला सिंगाजी धाम, आधारकार्ड और मास्क के बगैर नही मिलेगा मंदिर में प्रवेश

खंडवा। सुशील विधानी

निमाड़ के निर्गुणीसंत सिंगाजी महाराज का समाधी स्थल जो कोरोना वैश्विक महामारी के चलते 22 मार्च से सुरक्षा के हिसाब से बंद कर दिया गया था। जिसके खुलने ‌का इंतजार पूरे निमाड़ के साथ सभी संत सिंगाजी के भव्त कर रहे थे। जिनकी दर्शनों की अभिलाषा आज से पूरी हुई। संत सिंगाजी का समाधी स्थल 107 दिन बाद आज से सिंगाजी सभी भव्तो के लिए खूल गया हे। सीमा मौर्य तहसीलदार पुनासा मूंदी टीम के साथ संत सिंगाजी मंदिर परिसर पहुची ओर दर्शनों के लिए आने वाले कोरोना गाईड लाईन का पालन करते हुए सामाजिक दूरी के गोले ‌बनवाकर रेखांकन किया गया। मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

आधार कार्ड मास्क होगा अनिवार्य

संत सिंगाजी मंदिर के महंत रतन महाराज ने बताया कि बुधवार से संत सिंगाजी का समाधी स्थल दर्शनों के खुला गया हे। यहा आने वाले भव्तो के मंदिर परिसर में प्रवेश के सैनिटाइज होकर हाथ धुलाई के बादआधार कार्ड दिखाकर पूरी जानकारी देनी होगी। मास्क भी लगाना होगा सामाजिक दूरी पर बने गोलो में खड़े रहकर नियमों का पालन करना होगा। यह नियम हम सबकी सुरक्षा के लिए है। सबको पालन करना है। बगैर मास्क के परिसर में धूमने पर 100 रपये का आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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