
मध्य प्रदेश के जंगलों में लगातार बढ़ रहे इंसानी दखल और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का बुरा असर अब साफ दिखने लगा है। जंगल सिकुड़ने की वजह से वन्यजीव अपनी जान बचाने और भोजन की तलाश में अब सीधे रिहायशी इलाकों के आसपास भटकने को मजबूर हो रहे हैं।
दरअसल शहडोल जिले में एक तरफ जहां उमरिया के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से हाथियों का पूरा झुंड आ धमका है, वहीं दूसरी तरफ देवरी अमलाई में भालू के घूमने से लोगों की नींद उड़ी हुई है। जंगली जानवरों की इस बढ़ती आवाजाही ने आम जनता के साथ-साथ वन विभाग की भी मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं।
बांधवगढ़ से निकले हाथियों का डेरा
उमरिया जिले के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भटककर हाथियों का एक बड़ा झुंड उत्तर शहडोल वनमंडल के जंगलों को पार करता हुआ अब दक्षिण शहडोल पहुंच गया है। इस वक्त यह हाथियों का झुंड खन्नौधी परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सन्ना बीट के कक्ष क्रमांक आरएफ-562 में घूम रहा है। वन विभाग के अधिकारी लगातार इन पर नजर रखे हुए हैं, हालांकि गनीमत यह है कि अभी तक किसी भी इंसानी नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है।
करंट से बचाव के लिए 10 से ज्यादा गांवों की बिजली बंद
कुछ समय पहले करंट लगने से एक हाथी की दर्दनाक मौत हो जाने के बाद से ही वन और बिजली विभाग कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। हाथियों को किसी भी तरह के करंट से बचाने के लिए प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। जयसिंहनगर वन क्षेत्र के कनाड़ी, देवरी, नदना और गिरुई समेत लगभग 10 से अधिक गांवों की बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी गई है। इसकी वजह से ग्रामीण इलाकों के लोगों को इन दिनों बिजली के बिना भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
देवरी अमलाई में भालू की आवाजाही से दहशत
हाथियों के अलावा शहडोल के दूसरे इलाकों में भी जंगली जानवरों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दक्षिण शहडोल वनमंडल के केशवाही क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले देवरी अमलाई गांव में भालू के घूमने से हड़कंप मचा है। यह भालू कई बार सीधे गांव और बस्तियों के पास आ जाता है, जिसका डरावना वीडियो भी स्थानीय ग्रामीणों ने अपने मोबाइल में बना लिया है। भालू के आने की खबर मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को अकेले बाहर न निकलने की सलाह दी है।
पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और जंगलों का सिकुड़ना बना सबसे बड़ा कारण
शहडोल से सटे उमरिया के घुनघुटी इलाके और अनूपपुर के अमरकंटक जंगलों में धड़ल्ले से काटे जा रहे पेड़ों को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। पेड़ों के कटने से जानवरों का प्राकृतिक आशियाना उजड़ रहा है। जंगलों के लगातार सिकुड़ने और इंसानों की बढ़ती दखलअंदाजी की वजह से ही आज यह दिन देखना पड़ रहा है। वन्यजीवों का यूं गांवों की तरफ रुख करना सिर्फ आम लोगों की सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि हमारे पर्यावरण के लिए भी एक बहुत बड़ी चेतावनी है।

