दोस्त के साथ रेलवे ट्रैक पर स्टूडेंट खिंचवा रहा था फोटो, फिर जो हुआ वो सोचा नहीं था

दोस्त के साथ रेलवे ट्रैक पर स्टूडेंट खिंचवा रहा था फोटो, फिर जो हुआ वो सोचा नहीं था

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| सोशल मीडिया (Social Media) के इस दौर में सेल्फी (Selfie) का चलन घातक होता जा रहा है| सेल्फी के चक्कर में आये दिन बड़े हादसों की खबरे सामने आती रहती है| मामला अब भोपाल (Bhopal) से है, जहां रेल की पटरी पर खड़े होकर फोटोग्राफी (Photography) करना युवक को महंगा पड़ गया| युवक फोटोग्राफी में इतना खो गया कि उस मौत बनकर आती ट्रेन (Train) दिखाई ही नहीं दी| वह ट्रेन की चपेट में आने से नहीं बच पाया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

शाहपुरा इलाके में शनिवार शाम एक युवक की रेल की चपेट में आने से मौत हो गई। 18 वर्षीय आरिब खान पिता आफताफ खान 15 दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के बदायूं से भोपाल अपने मामा के पास आया था। वह शनिवार दोपहर अपने दोस्तों के साथ फोटो खिंचवाने का कहकर घर से निकला था। युवक बीफार्मा की पढ़ाई कर रहा था और शनिवार को आरिब अपने दोस्त के साथ बावाड़िया कलां रेलवे फाटक के पास पल्लवी नगर में फोटोग्राफी करने गया था। वहां दोनों बावड़िया रेलवे पटरी की तरफ फोटो खींच रहे थे।

फोटोग्राफी में ट्रेन का ध्यान ही नहीं रहा
आरिब फोटो खींचते-खींचते पटरी पार कर रहा था, तभी उस ट्रैक पर एक तेज रफ्तार ट्रेन आ गई। रेल की आवाज सुन उसके दोस्त ने उसे ट्रैक से हटने के लिए काफी आवाज लगाई, लेकिन आरिब सुन नहीं सका और रेल की चपेट में आ गया। पुलिस ने मौके से शव बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया। आरिब 15 दिन पहले ही भोपाल आया था। वह उसके मामा शारिक खान के साथ जानकी अस्पताल के पास शाहपुरा में रहता था। उसने अभी राजीव गांधी कॉलेज में बी फार्मा में एडमिशन लिया था।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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