उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों को रेलवे से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। टनकपुर से बागेश्वर तक प्रस्तावित 170 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का फील्ड सर्वे पूरा हो चुका है। इसके साथ ही इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी तैयार कर ली गई है। हालांकि रेल मंत्रालय ने साफ किया है कि इस परियोजना में यात्री और मालवाहन ट्रैफिक की संभावना कम है। यह जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में दी।
परियोजना की लागत 48,692 करोड़ रुपए आंकी गई
रेल मंत्री ने बताया कि टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के निर्माण की अनुमानित लागत 48,692 करोड़ रुपये है। यह राशि बेहद बड़ी है और इसमें शामिल निर्माण कार्य चुनौतीपूर्ण होंगे, क्योंकि यह क्षेत्र पूरी तरह से पहाड़ी और संवेदनशील भौगोलिक स्थिति वाला है। रेल मंत्री ने यह भी बताया कि इस रेलवे लाइन में यातायात की संभावनाएं सीमित हैं, जिसका असर परियोजना की स्वीकृति पर पड़ सकता है।
स्वीकृति के लिए कई स्तरों पर विचार जरूरी
रेलवे परियोजनाओं को लागू करने से पहले कई विभागों और संस्थाओं से मंजूरी लेना आवश्यक होता है। रेल मंत्री ने बताया कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनने के बाद इस प्रस्ताव को राज्य सरकार, नीति आयोग और वित्त मंत्रालय जैसी संस्थाओं के पास भेजा जाएगा। इसके बाद ही परियोजना को स्वीकृति मिल सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी बड़ी परियोजनाओं की मंजूरी एक सतत प्रक्रिया होती है और कोई निश्चित समय सीमा नहीं दी जा सकती।
उत्तराखंड के लिए रेल बजट में भारी बढ़ोतरी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि उत्तराखंड के रेल विकास के लिए बजट में भारी इजाफा किया गया है। वर्ष 2009–2014 के दौरान राज्य को प्रति वर्ष औसतन 187 करोड़ रुपये मिले थे। अब यह बजट 2025–26 तक बढ़कर 4,641 करोड़ रुपये हो गया है। यानी उत्तराखंड के रेल अवसंरचना बजट में लगभग 25 गुना की बढ़ोतरी हुई है। यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार उत्तराखंड में रेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए गंभीर है।
राज्य में तीन नई रेलवे लाइनें भी स्वीकृत
रेल मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में एक अप्रैल 2025 तक 216 किलोमीटर लंबाई की तीन नई रेलवे लाइनों को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं की कुल लागत 40,384 करोड़ रुपये है।
यह काम लगातार प्रगति पर है और इसके पूरे होने से राज्य के दुर्गम और सीमावर्ती इलाकों में परिवहन की सुविधा बढ़ेगी।





