सरकार की नई व्यवस्था, मरीज का इलाज किस डॉक्टर ने किया है? अब लग जायेगा पता  

सरकार की नई व्यवस्था, मरीज का इलाज किस डॉक्टर ने किया है? अब लग जायेगा पता  

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट।  प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों (Medical Colleges) द्वारा संचालित बड़े और शासकीय अस्पतालों (Government hospitals) में मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी तय करने के लिए सरकार ने एक नई व्यवस्था लागू की है। इस नई व्यवस्था के निर्देश आज शनिवार को चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग (Medical Education Minister Vishwas Sarang) ने हमीदिया अस्पताल (Hamidia Hospital) के निरीक्षण के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि अब हमीदिया अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों के पर्चे पर डॉक्टरों का नाम, मोबाइल नंबर और उनकी सील भी लगानी होगी, जिससे ये पता रहे कि मरीज का इलाज किस डॉक्टर ने किया है। उन्होंने कहा कि ये व्यवस्था  प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज और उनसे जुड़े अस्पतालों में लागू होगी। मंत्री के निर्देश के बाद यह व्यवस्था हमीदिया अस्पताल में शनिवार दोपहर बाद ही लागू कर दी है।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग (Medical Education Minister Vishwas Sarang) ने शनिवार को हमीदिया अस्पताल का निरीक्षण किया । मंत्री ने 9 अलग-अलग मरीजों से बातचीत की। उसके बाद अस्पताल प्रबंधन से कहा है कि मैंने जितने भी मरीजों से बातचीत की है उसमें पता चला है कि मरीजों को कहां पर्चा बनवाना है, किस जांच के लिए कहां जाना है, आयुष्मान कार्ड का रजिस्ट्रेशन कहां होना है और दवाइयां कब कहां मिलनी है ये ढूंढने में दिक्कत हो रही है, मरीजों को समय भी लग रहा है उन्हें हर बार अलग-अलग जगह अलग-अलग काउंटरों पर जाकर लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है और मरीज के परिजनों को परेशान होना पड़ता है। यह व्यवस्था बीमारी से जूझ रहे मरीज के लिए ठीक नहीं है। मंत्री विश्वास सारंग ने गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अरुणा गुप्ता और अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आईडी चौरसिया को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल में ऐसी व्यवस्था की जाए कि मरीज को कम से कम समय में पूरा इलाज मिल सके।

मंत्री के निर्देश, मरीजों के लिए बनायें अलग अलग पाथ-वे 

चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि अस्पताल का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मरीज के साथ आने वाले परिजन, कर्मचारी, अधिकारी और मरीज की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल में मरीजों के लिए एक अलग पाथ-वे बनाने पर विचार करें। जिसमें केवल मरीज ही आना जाना कर सकें। अधिकारियों ने कहा कि इस पर विचार करेंगे और रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। मंत्री विश्वास सारंग इमरजेंसी विभाग के सामने पहुंचे तो उन्होंने देखा कि अस्पताल के सामने ही पानी टपक रहा है। इस पर उन्होंने गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अरुणा गुप्ता से कहा कि मैडम इधर तो आप रोज आते होंगे। जब यह मुझे दिख गया तो आपको क्यों नहीं दिखा और जब दिख गया था तो इसे ठीक क्यों नहीं करवाया। इस पर डीन डॉ. अरुणा गुप्ता ने मंत्री को सफाई दी और जल्दी पानी का लीकेज ठीक करने की बात कही है।

Atul Saxena
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Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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