भारत में डिजिटल पेमेंट का विस्तार केवल शहरों में नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी हो रहा है। 1 अप्रैल से ऑनलाइन पेमेंट (Digital Payment Rules) में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सभी डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए ने टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया है। इससे संबंधित दिशा निर्देश सितंबर 2025 में ही जारी किए गए थे।
नए नियमों के तहत प्रमाणीकरण के लिए किसी खास फैक्टर को अनिवार्य नहीं किया गया है। यूजर्स किसी भी दो फैक्टर को चुन सकते हैं। इसका पालन सभी पेमेंट सिस्टम प्रोवाइड, पेमेंट सिस्टम प्रतिभागी, बैंक और नॉन बैंकिंग संस्थाओं को करना होगा। बदलाव सभी डोमेस्टिक डिजिटल पेमेंट ट्रांजेक्शन पर प्रभावी होगा। हालांकि किसी खास मामले में छूट भी दी जाएगी।
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वर्तमान में ज्यादातर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए ओटीपी बेस्ड ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है। जिसके कारण फिशिंग, सिम स्वैप स्कैम, मालवेयर अटैक और देर से डिलीवरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। धोखाधड़ी के मामलों पर काबू पाने और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया गया है।
क्या हैं नए नियम?
- जारीकर्ताओं को यह ध्यान रखना होगा कि यदि इन निर्देशों का पालन किए बिना किसी ट्रांजेक्शन से नुकसान होता है, तो उन्हें ग्राहक के नुकसान की पूरी भरपाई करनी होगी।
- जारीकर्ता यह भई सुनिश्चित करेंगे डिजिटल पर्सनल डेटा एक्ट 2023 के तहत प्रावधानों का पूरी तरीके से पालन हो।
- आरबीआई ने प्रमाणीकरण के लिए दो फैक्टर का चुनाव अनिवार्य किया है। यूजर्स पासवर्ड या पास फ्रेस, सिम बेस्ड ओटीपी, हार्डवेयर टोकन, कार्ड सॉफ्टवेयर बेस्ड ऑथेंटिकेशन, टोकन बायोमैट्रिक फिंगरप्रिं और फैशियल रिकॉग्निशन में से किसी भी दो ऑप्शन को चुन सकते हैं। सेंट्रल बैंक जारीकर्ताओं को कस्टमर को ऑथेंटिकेशन मेथड चुनने की सुविधा ऑफर करने का निर्देश भी दिया है।
क्रॉस बॉर्डर ट्रांजेक्शन पर लागू नहीं होगा नियम
यह नियम क्रॉस बॉर्डर ट्रांजेक्शन पर लागू नहीं होगा। हालांकि जारीकर्ताओं को 1 अक्टूबर 2026 तक ऐसा सिस्टम बनाना होगा, जिससे नॉन-रेकरिंग, सीमा-पर कार्ड नॉन प्रेजेंट ट्रांजेक्शन को वेरीफाई कर सके। जिनके लिए ऑथेंटिकेशन का अनुरोध किसी विदेशी व्यापारी द्वारा किया जाएगा। इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जारी कर्ताओं को अपने बैंक आईडेंटिफिकेशन नंबर को कार्ड नेटवर्क के साथ रजिस्टर करवाना होगा। इसके अलावा 1 अक्टूबर तक सीएनपी ट्रांजैक्शन को संभालने के लिए जोखिम आधारित सिस्टम भी लागू करना।
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