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बजट 2026 से पहले आज आएगा देश का ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’, इकोनॉमिक सर्वे में महंगाई, रोजगार और GDP पर रहेगी नजर

Written by:Rishabh Namdev
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सरकार आज संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेगी, जिसे आम बजट से पहले देश की अर्थव्यवस्था का रिपोर्ट कार्ड माना जाता है। इस सर्वे में पिछले एक साल में महंगाई, खेती, नौकरियों और GDP की स्थिति का पूरा ब्योरा दिया जाएगा।
बजट 2026 से पहले आज आएगा देश का ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’, इकोनॉमिक सर्वे में महंगाई, रोजगार और GDP पर रहेगी नजर

आम बजट 2026 से ठीक पहले सरकार आज यानी 29 जनवरी को देश का आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश करेगी। यह सर्वेक्षण पिछले एक साल में भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन का विस्तृत लेखा-जोखा होता है और भविष्य की आर्थिक चुनौतियों और अवसरों की रूपरेखा तैयार करता है। इसे देश का ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ भी कहा जाता है।

वित्त मंत्रालय की तरफ से मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) डॉ. वी अनंत नागेश्वरन की अगुवाई में यह सर्वे तैयार किया गया है। यह सर्वे बताएगा कि देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत कैसी है और आने वाले समय में इसके किस दिशा में जाने की उम्मीद है। 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट की दिशा भी काफी हद तक इस सर्वे से तय होती है।

सर्वे में इन 6 मुद्दों पर रहेगी खास नजर

इस साल के आर्थिक सर्वेक्षण में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान केंद्रित रहने की उम्मीद है, जो सीधे तौर पर आम आदमी से लेकर बड़े उद्योगों तक को प्रभावित करते हैं।

1. महंगाई और GDP: सर्वे में यह बताया जाएगा कि बीते साल दाल, तेल और सब्जियों जैसी जरूरी चीजों की कीमतें क्यों बढ़ीं और भविष्य में इससे राहत मिलने की क्या उम्मीद है। साथ ही, यह भी आकलन पेश किया जाएगा कि क्या भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का तमगा बनाए रखेगा। अच्छी GDP ग्रोथ का मतलब देश में निवेश और व्यापार बढ़ना होता है।

2. नौकरियां: युवाओं के लिए यह सबसे अहम हिस्सा होगा। सर्वे में इस बात का विश्लेषण होगा कि IT, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस जैसे सेक्टरों में रोजगार की क्या स्थिति रही। किस सेक्टर ने सबसे ज्यादा नौकरियां दीं और कहां छंटनी का खतरा बना हुआ है।

3. खेती-किसानी: देश की एक बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। सर्वे में कृषि क्षेत्र की विकास दर और किसानों की आय को लेकर सरकार की योजनाओं और उनके असर का ब्योरा दिया जाएगा।

4. सरकारी खजाना और कर्ज: सरकार के खर्च और कमाई के अंतर यानी ‘राजकोषीय घाटे’ की स्थिति क्या है, इस पर भी रिपोर्ट पेश की जाएगी। घाटे का कम होना अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत माना जाता है। इसके अलावा, वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति पर भी जानकारी दी जाएगी, जो डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूती देता है।

क्या होता है इकोनॉमिक सर्वे?

आर्थिक सर्वेक्षण देश की अर्थव्यवस्था की सेहत बताने वाला एक सालाना दस्तावेज है। इसमें पिछले 12 महीनों में अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों के प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण होता है। इसमें सरकार की नीतियों के नतीजों का मूल्यांकन करने के साथ-साथ आने वाले साल के लिए सुधारों की सिफारिशें भी की जाती हैं।

कौन तैयार करता है सर्वे?

यह महत्वपूर्ण दस्तावेज वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (Economic Affairs Department) की इकोनॉमिक डिवीजन द्वारा मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) के मार्गदर्शन में तैयार किया जाता है। फिलहाल डॉ. वी अनंत नागेश्वरन देश के CEA हैं। हालांकि, सरकार इस सर्वे को पेश करने या इसकी सिफारिशों को मानने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है, लेकिन आमतौर पर बजट बनाते समय इन सुझावों को ध्यान में रखा जाता है।

1964 से बदली परंपरा

देश का पहला आर्थिक सर्वेक्षण 1950-51 में पेश किया गया था। तब यह केंद्रीय बजट का ही एक हिस्सा होता था। साल 1964 के बाद इसे बजट से अलग कर दिया गया और तभी से इसे बजट पेश होने से एक दिन पहले संसद में रखने की परंपरा शुरू हुई।