
Insurance Policy New Rules: इंश्योरेंस पॉलिसी में निवेश करने वालों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। बीमा रेगुलेटर IRDAI ने बीमा पॉलिसी जुड़े नए नियम जारी किए हैं। जिसका असर निवेशकों पर भी पड़ेगा। नए रूल्स 1 अप्रैल 2024 से लागू होंगे। सिध्दांत आधारित 8 नियमों को मंजूरी दी गई है। 34 नियमों को 6 में बदला गया है। वहीं दो नए नियमों को लाया गया है।
क्या कहते हैं नए नियम?
नए नियमों के तहत यदि पॉलिसीहोल्डर तीन साल के भीतर बीमा को सरेंडर करता है तो सरेंडर वैल्यू समान या कम होगा। वहीं चौथे और 7वें साल के बीच इंश्योरेंस को सरेंडर करते कर Surrender Value अधिक हो सकता है। इंश्योरेंस सेक्टर को बूस्ट करने के लिए नियमों में संशोधन किया गया है।
नॉन-सिंगल प्रीमियम के लिए सरेंडर वैल्यू
- यदि दूसरे साल के दौरान पॉलिसी को सरेंडर किया जाता है तो कुल प्रीमियम का 30% भुगतान किया जाएगा।
- तीसरे वर्ष के दौरान पॉलिसी को सरेंडर करने पर प्रीमियम का 35% भुगतान किया जाएगा।
- चौथे और सातवें वर्ष के बीच पॉलिसी को सरेंडर करने पर कुल प्रीमियम का 50% भुगतान किया जाएगा।
- मैच्योरिटी के दो साल पहले पॉलिसी सरेंडर करने पर कुल प्रीमियम का 90% भुगतान किया जाएगा।
सिंगल प्रीमियम के लिए सरेंडर वैल्यू
- तीसरे साल पॉलिसी को सरेंडर करने पर कुल प्रेमियन का 75% मिलेगा।
- चौथे साल पॉलिसी को सरेंडर करने पर कुल प्रीमियम का 90% भुगतान किया जाएगा।
- मैच्योरिटी के दो साल पहले पॉलिसी सरेंडर करने पर कुल प्रीमियम 90% भुगतान किया जाएगा।
लेखक के बारे में
पत्रकारिता जनकल्याण का माध्यम है। एक पत्रकार का काम नई जानकारी को उजागर करना और उस जानकारी को एक संदर्भ में रखना है। ताकि उस जानकारी का इस्तेमाल मानव की स्थिति को सुधारने में हो सकें। देश और दुनिया धीरे–धीरे बदल रही है। आधुनिक जनसंपर्क का विस्तार भी हो रहा है। लेकिन एक पत्रकार का किरदार वैसा ही जैसे आजादी के पहले था। समाज के मुद्दों को समाज तक पहुंचाना। स्वयं के लाभ को न देख सेवा को प्राथमिकता देना यही पत्रकारिता है।
अच्छी पत्रकारिता बेहतर दुनिया बनाने की क्षमता रखती है। इसलिए भारतीय संविधान में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ बताया गया है। हेनरी ल्यूस ने कहा है, " प्रकाशन एक व्यवसाय है, लेकिन पत्रकारिता कभी व्यवसाय नहीं थी और आज भी नहीं है और न ही यह कोई पेशा है।" पत्रकारिता समाजसेवा है और मुझे गर्व है कि "मैं एक पत्रकार हूं।" View all posts by Manisha Kumari Pandey →

