
देश के सभी बैंक और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों को रेगुलेट करने की जिम्मेदारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की है। आरबीआई बैंकिंग नियमों का उचित पालन और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। जब कोई बैंक नियमों का अनुपालन नहीं करते, तब उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी करता है। अक्टूबर में अब तक केंद्रीय 14 बैंकों पर मौद्रिक जुर्माना लगा चुका है। इस सूची में एक और सहकारी बैंक शामिल हो चुका है।
आरबीआई ने उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला सहकारी बैंक लिमिटेड पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसे संबंधित आदेश बैंक को 3 अक्टूबर को जारी किया गया था। वहीं इस एक्शन की जानकारी आरबीआई ने 23 अक्टूबर 2025 गुरुवार को प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी है। यह बीआर एक्ट 1949 की धारा 47 ए (1)(c), धारा 46(4) (आई) और 56 के प्रावधानों के तहत उठाया है।
निरीक्षण के दौरान नियमों के उल्लंघन के पता चला
31 मार्च 2024 को बैंक वित्तीय स्थिति को चेक करने के लिए नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) ने एक निरीक्षण किया था। इस दौरान नियमों के अनुपालन में कमियों का पता चला। जिसे देखते हुए सभी बैंकों को आरबीआई ने नोटिस जारी किया और पूछा कि उन पर पेनल्टी क्यों न लगाई जाए। बैंक की प्रतिक्रिया और मौखिक सुनवाई के दौरान पर दी गई प्रस्तुतियों के आधार पर आरोपों की पुष्टि हुई। जिसके बाद जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया।
क्या है आरोप?
सभी बैंकों के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर पात्र दावा न की गई राशि को जमाकर्ता शिक्षा एवं जागरूकता कोष में ट्रांसफर करना अनिवार्य होता है। लेकिन बैंक यह काम पूरा करने में विफल रहा। ऐसे में बीआर एक्ट 1949 की धारा 26(ए) और 56 का उल्लंघन हुआ। आरोपों की पुष्टि हो जाने पर आरबीआई ने पेनल्टी लगाई।
केंद्रीय बैंक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस कार्रवाई का असर ग्राहकों और बैंक के बीच हो रहे किसी भी एग्रीमेंट या लेनदेन की वैधता पर नहीं पड़ेगा। कस्टमर अभी भी पहले की तरह ट्रांजे क्शन जारी रख सकते हैं।

