इस सप्ताह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) कई बैंकों और नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम हो चुका है। एक बार फिर आरबीआई की कार्रवाई देखने को मिली है। एक सहकारी बैंक पर प्रतिबंध लगाया गया है। खाताधारकों को पैसे निकालने की अनुमति भी नहीं होगी। वहीं एक एनबीएफसी पर लाखों का जुर्माना भी लगा है, यह कदम नियमों का उल्लंघन होने पर सेंट्रल बैंक ने उठाया है।
रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने कनक पट्टन सहकारी बैंक नियमित दावणगेरे को 12 मार्च से बिजनेस बंद करने का आदेश जारी किया है। इस बैंक को बैंकिंग व्यवसाय करने से रोका गया है। आरबीआई की मंजूरी के बिना इसे कोई लोन या एडवांस स्वीकृत या रिन्यू करने की अनुमति होगी। भुगतान और एग्रीमेंट या व्यवस्था पर भी रोक लगाई गई है। संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने की अनुमति भी नहीं होगी।
वजह और ग्राहकों पर असर जानें
इस बैंक के वर्तमान लिक्विडिटी की स्थिति को देखते हुए आरबीआई ने यह उठाया है। खाताधारकों को किसी प्रकार की निकासी की अनुमति बैंक नहीं दे सकता। हालांकि कुछ शर्तों के अधीन जमा राशि पर लोन सेटऑफ करने की अनुमति होगी। कर्मचारियों के वेतन, किराया, बिजली के बल आदि पर व्यय करने की छूट दी गई है।
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इन निर्देशों को बैंकिंग लाइसेंस रद्द होना नहीं माना जाएगा। 6 महीने तक बैंक के स्टेटस की निगरानी की जाएगी। स्थिति में बदलाव होने पर निर्देशों में बदलाव भी हो सकता है। हालांकि ग्राहकों को सुरक्षा भी मिलेगी। डीआईसीजीसी ने जमा बीमा दावा राशि की प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी, इसकी लिमिट 5 लाख रुपये है। इसके लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ सहमति प्रस्तुत करनी होगी।
PR22570307AF6BA40A4FAD9F0631521D322A3Fइस कंपनी पर गिरी गाज
मण्प्पुरम फाइनेंस लिमिटेड कंपनी पर 2.70 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। यह कदम कुछ निर्देशों का पालन न करने पर उठाया गया है। मार्च 2025 में एक निरीक्षण के दौरान आरबीआई को नियमों के अनुपालन में खामियों का पता चला था। जिसके बाद नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा। नोटिस पर प्राप्त जवाब और व्यक्तिगत सुनाई के दौरान दी गई प्रस्तुति और दलीलों के आधार पर आरोप साबित हुए। इसके बाद इस पर जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया। कंपनी ने कुछ मुख्य प्रबंधीय कर्मियों को उनका पूरा परिवर्तनीय वेतन बिना किसी स्थगन के एडवांस के रूप में भुगतान कर दिया था। हालांकि इसका असर ग्राहकों और बैंकों के बीच हो रहे हैं किसी भी लेनदेन पर नहीं पड़ेगा।
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