RBI की बड़ी कार्रवाई, इस बैंक पर लगा ताला, लाइसेंस रद्द, कहीं इसमें आपका खाता तो नहीं?

आरबीआई ने एक बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है। कारोबार जारी रखने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन होने पर एक बैंक पर पेनल्टी भी लगाई गई है। आइए जानें ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
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रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने महाराष्ट्र के दो बैंकों के खिलाफ सख्ती दिखाई है। एक का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। वहीं दूसरे पर भारी पेनल्टी लगाई गई है।  आरबीआई ने यह कदम बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के विभिन्न प्रावधानों के तहत उठाया है। इस क्षेत्र की जानकारी केंद्रीय बैंक ने 6 अप्रैल को प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी है।

शिरपुर मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। इस बैंक को 6 अप्रैल से बैंकिंग बिजनेस करने की अनुमति नहीं होगी। लाइसेंस कैंसिल होने के बाद यह बैंक न तो डिपॉजिट स्वीकार कर सकता है और न ही इसे रीपेमेंट की अनुमति होगी। यह कदम बैंक के पास पर्याप्त कैपिटल और कमाई की संभावनाएं न होने के कारण उठाया गया है। यदि इसे व्यवसाय जारी रखने दिया जाता तो जमा कर्ताओं के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।  इसकी स्थिति इतनी खराब है यह अपने खाताधारकों को पूरी राशि का भुगतान भी नहीं कर सकता।

ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

आरबीआई के इस एक्शन का असर ग्राहकों पर भी पड़ेगा। हालांकि खाताधारकों को सुरक्षा भी प्रदान की जाएगी। प्रत्येक जमाकर्ता डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) से 5 लाख रुपये तक की मौद्रिक सीमा तक जमा बीमा दावा राशि प्राप्त करने का हकदार होगा। बैंक द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के मुताबिक लगभग 99.7% जमाकर्ता अपनी पूरी राशि प्राप्त कर सकते हैं। 31 जनवरी 2026 तक बीमा जमा राशि में से 48.95 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही कर दिया है।

इस बैंक पर लगा जुर्माना

रिजर्व बैंक भारतीय रिजर्व बैंक में महाराष्ट्र के अमरावती में स्थित डॉ पंजबराव देशमुख अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 1.09 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। निरीक्षण के दौरान आरबीआई को नियमों के अनुपालन में खामियों का पता चला था। जिसके बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस पर मिले जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई प्रस्तुतियों के आधार पर आरोप साबित हुए। इसके बाद पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।

इस बैंक ने  कुछ अवसरों पर गैर-एसएलआर निवेशों के निर्धारित विवेकपूर्ण एकल प्रतिपक्ष जोखिम सीमा का उल्लंघन किया। इसके अलावा NEFT ट्रांजेक्शन पर निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क भी वसूला। इस कार्रवाई का असर ग्राहकों और बैंक के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन या समझौते पर नहीं पड़ेगा।

Manisha Kumari Pandey
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