RBI का बड़ा कदम, डिजिटल पेमेंट से जुड़े कई नियम बदले, नया ई-मैंडेट फ्रेमवर्क लागू 

आरबीआई ने डिजिटल पेमेंट के ई-मैंडेट फ्रेमवर्क लागू किया है। कई नियम बदले गए हैं। जिससे ग्राहकों को फायदा होगा। बड़ा बिल पेमेंट आसान होगा। आइए एक-एक इन बदलावों को जानें-
rbi digital payment rules

रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने 21 अप्रैल से डिजिटल पेमेंट के लिए ई-मैंडेट फ्रेमवर्क 2026 लागू कर दिया है। इससे संबंधित दिशा निर्देश भी जारी किए गए हैं, जो सभी पेमेंट सिस्टम प्रोवाइड और पेमेंट सिस्टम पार्टिसिपेंट पर लागू होंगे। इसी के साथ-साथ रेकरिंग ट्रांजैक्शन, डोमेस्टिक या क्रॉस बॉर्डर लेनदेन (यूपीपी/पीपीआई/कार्ड के जरिए) लागू होंगे। इसकी जानकारी ग्राहकों को होनी चाहिए।

नए नियमों के तहत जो कस्टमर ई-मैंडेट की सुविधा लेना चाहता है, उसे एक बार रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरा करना होगा। मैंडेट का रजिस्ट्रेशन तभी होगा जब जारीकर्ता द्वारा जरूरी सामान्य प्रक्रिया के अलावा अतिरिक्त प्रमाणीकरण कारक (AFA) का सफल सत्यापन पूरा किया पूरा होगा। जारीकर्ता द्वारा पंजीकृत हर ईमेल पर इसकी वैधता अवधि भी बताएंगे। कस्टमर को किसी भी समय वैधता अवधि बदलने या मैंडेट वापस लेने की सुविधा भी मिलेगी। जिसकी जानकारी जारीकर्ताओं को रजिस्ट्रेशन के दौरान ही देनी होगी।

ई-मैंडेट में बदलाव के लिए AFA सत्यापन जरूरी

ई-मैंडेट निश्चित राशि या कुल सीमा के अधीन एक परिवर्तनशील राशि के लिए हो सकता है। परिवर्तनशील लिमिट के मामले में जारीकर्ता कस्टमर को किसी भी आवर्ती लेनदेन का अधिकतम मूल्य तय करने की सुविधा भी देंगे। कस्टमर को सूचना पाने के लिए उपलब्ध विकल्पों एसएमएस, ईमेल आदि में से कोई एक तरीका चुनने या बदलने की सुविधा दी जाएगी। किसी मौजूदा ई-मैंडेट में कोई भी बदलाव या उसे वापस लेने के लिए भी जारीकर्ता एएफए सत्यापन करेंगे।

आवर्ती भुगतान के लिए लिमिट तय 

रेकरिंग ट्रांजेक्शन यानी आवर्ती लेनदेन के लिए भी सीमा निर्धारित की है। बिना ओटीपी प्रति लेनदेन की सीमा 15,000 रुपये होगी। एएफए सत्यापन अनिवार्य नहीं होगा। वहीं यदि इससे अधिक अमाउंट का ट्रांजेक्शन किया जाता है, तो AFA अनिवार्य होगा। इंश्योरेंस प्रीमियम, म्युचुअल फंड सब्सक्रिप्शन, क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट का भुगतान भी बिना एएफए किया जा सकता है, हालांकि प्रति ट्रांजेक्शन की सीमा एक लाख रुपये होगी।

इन नियमों को भी जान लें 

असल चार्ज/डेबिट से 24 घंटे पहले लेनदेन जारीकर्ताओं को लेनदेन से संबंधित नोटिफिकेशन भेजना होगा। नोटिफिकेशन में ग्राहकों कर मर्चेंट का नाम, लेनदेन की रकम, डेबिट की तारीख, समय, ई-मैंडेट का रिफरेंस नंबर, डेबिट का कारण इत्यादि की जानकारी देनी होगी। जारीकर्ता लेनदेन के बाद भी सूचना भेजेंगे, जिसमें शिकायत निवारण की जानकारी भी दी जाएगी।

रेकरिंग ट्रांजेक्शन के लिए के लिए ई-मैंडेट सुविधा पर ग्राहकों को कोई भी चार्ज नहीं देना होगा। आरबीआई के निर्देशों का पालन करते हुए फिर से जारी गए कार्ड से मौजूदा ई-मैंडेट को जोड़ा जा सकता है।  शिकायतों के समाधान के लिए जारीकर्ता एक उचित विवाद प्रणाली स्थापित करेंगे। ताकि ग्राहकों को शिकायत दर्ज करने में आसानी हो सके।

Manisha Kumari Pandey
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