रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने केवाईसी में “खातों के संचालन और मनी म्यूल अकाउंट” के बारे में निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को आरबीआई को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर अपनाने के आदेश दिए थे। जिसके बाद बात केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है। SOP में गतिविधि और साइबरफ़ोर्स से जुड़ी रखम खातों पर अस्थायी डेबिट रोक लगाने के लिए बैंकों द्वारा की जाने वाली जरूरी कार्रवाई को शामिल किया गया है।
मसौदे के मुताबिक बैंक संदिग्ध म्यूल लेनदेन खातों पर 60 दिनों तक के लिए अस्थायी डेबिट रूप लगा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर कानून प्रवर्तन एजेंसी के समन्वय से रोक भी हटाई जा सकती है। हालांकि ऐसे मामले में बैंक को ग्राहक को सूचित करना होगा और उनसे लेनदेन की प्रकृति स्पष्ट करने के लिए रिक्वेस्ट करना होगा। बैंक साइबर इनेब्लड फ्रॉड को रोकने या जारी करने का फैसला ले सकता है। जरूरत पड़ने पर पुलिस या कानून प्रवर्तन एजेंसी को शामिल किया जा सकता है।
क्या हैं नए नियम?
ग्राहकों को समझने के लिए 20 दिन का समय दिया जाएगा। स्पष्टीकरण प्राप्त होने के बाद बैंक 10 दिनों के भीतर फैसला ले सकते हैं। पुलिस या अधिकारी की प्रतिक्रिया का समय 30 दिन होगा। बैंकों को फैसले की जानकारी तुरंत खाताधारकों को देनी होगी। एसओपी में इंटरनल पॉलिसी की बातें भी शामिल की गई हैं। संदिग्ध मनी म्यूल और साइबर इनेब्लड फ्रॉड प्रक्रिया की पहचान करने वाले टेक सॉल्यूशन शामिल है। अकाउंट लेवल पर अस्थायी डेबिट होल्ड आखिरी उपाय के तौर पर या सिर्फ खास स्थिति में ही लगाई जाए। अकाउंट होल्डर से बातचीत के तरीके और उसके लिए टेंप्लेट का प्रावधान भी होगा। इसके अलावा गृह मंत्रालय के एनसीआर सीएफसीएफआरएमएस पोर्टल से जुड़ने की प्रक्रिया भी शामिल की जाएगी।
कस्टमर की शिकायत दूर करने के लिए भी एक सिस्टम तैयार किया जाएगा। इसके अलावा ट्राजेक्शन के एनालिसिस के व्यवस्था भी होगी। बैंकों को एक सेंट्रलाइज्ड MIS रिकॉर्ड रखना होगा। रिकॉर्ड को सुपरवाइजर रिव्यू के लिए भी उपलब्ध करवाया जाएगा। हर स्तर पर नोडल ऑफिसर भी नियुक्त किए जाएंगे। शिकायत मिलने पर उसकी पावती दी जाएगी और 30 दिनों के भीतर उसका समाधान करना होगा।
कब लागू होंगे नए नियम?
ड्राफ्ट नियम पर आम जनता से फीडबैक भी मांगा गया है, अंतिम तारीख 2 अक्टूबर 2026 है। नागरिक आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर “कनेक्ट टू रेगुलेट” सेक्शन पर जाकर अपना फीडबैक दे सकते हैं। इसके अलावा ईमेल के जरिए भी अपनी राय साझा कर सकते हैं। जनता की राय को पर विचार करने के बाद नए नियम लागू किए जाएंगे। नोटिफिकेशन के मुताबिक SOP 1 अप्रैल 2027 से लागू हो सकते हैं। जिसका पालन सभी कमर्शियल बैंकों और अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों को करना होगा।






