धार शहर में वराह मार्च को लेकर मंगलवार को पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। दरअसल त्रिमूर्ति चौराहे समेत कई प्रमुख स्थानों पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मार्च में शामिल होने पहुंचे लोगों को हिरासत में लिया। वहीं शहर के अलग-अलग इलाकों में लगातार गश्त की गई और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। बता दें कि प्रशासन ने पहले ही मार्च और बाइक रैली की अनुमति निरस्त कर दी थी जिसके बाद पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
दरअसल वराह मार्च को लेकर शहर के प्रवेश मार्गों पर भी निगरानी रखी गई। पुलिस अधिकारियों ने प्रमुख चौराहों और बाजार क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण किया। प्रशासन का कहना रहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं।
अस्थायी जेल भी बनाई गई
वहीं इससे पहले सुबह वराह मार्च के लिए सनातन प्रहरी समिति से जुड़े लोगों के PG कॉलेज मैदान में जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पूरे परिसर को सील कर दिया। मैदान और उसके आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और किसी भी व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। दरअसल कार्रवाई के दौरान समिति के आयोजक अंशुल शर्मा और आशीष बसु को भी हिरासत में लिया गया। इसके अलावा शहर के अलग-अलग स्थानों से लोगों को हिरासत में लेने के बाद कुल संख्या करीब 40 तक पहुंच गई। प्रशासन ने कॉलेज परिसर में अस्थायी जेल भी बनाई थी जहां हिरासत में लिए गए लोगों को रखा गया।
पुलिस ने हर स्थिति पर रखी नजर
दरअसल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय डावर के मुताबिक कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर में करीब 800 से 1000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। अलग-अलग थानों के थाना प्रभारी शहर के प्रवेश मार्गों और प्रमुख इलाकों में निगरानी करते रहे। पुलिस टीमों ने पूरे दिन लगातार भ्रमण कर स्थिति पर नजर बनाए रखी।
ड्रोन और CCTV से पूरे शहर पर नजर
बता दें कि जिस विजय मंदिर तक वराह मार्च ले जाने की घोषणा की गई थी उसे सुरक्षा कारणों से पूरे दिन बंद रखा गया। इस संरक्षित स्मारक को मुस्लिम समाज लाट मस्जिद के नाम से जानता है। संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इसे अस्थायी रूप से आम लोगों के लिए बंद रखा। पूरे शहर में CCTV कैमरों के साथ ड्रोन से निगरानी की गई। कई हाईराइज इमारतों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती रही, ताकि संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा सके।






