शिक्षा मंत्रालय और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय दोनों साथ मिलकर देशभर के विभिन्न स्कूलों में ई-वेस्ट अवेयरनेस कैंपेन और कलेक्शन ड्राइव का आयोजन कर रहे हैं। यह इको क्लब मिशन लाइफ के अंतर्गत चलाया जा रहा है। जिसमें दो चरण शामिल हैं। इस कैंपेन को लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सभी सम्बद्ध स्कूलों को सर्कुलर जारी किया है। जरूर दिशा निर्देश दिए गए हैं, जिसका पालन स्कूलों को करना होगा।
दोनों फेज के लिए अलग-अलग गतिविधियां निर्धारित की गई है। फेज-1 15 से लेकर 30 सितंबर तक स्कूल लेवल पर चलेगा। इस दौरान स्कूलों को एक समर्पित ई-वेस्ट कलेक्शन स्थापित करना होगा। सभी कोने में एक सुरक्षित और सूखा कंटेनर रखा जाएगा। इसके बाद इसकी नोडल मैपिंग होगी।
जिला प्राधिकरण स्कूल क्लस्टर सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड या स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से कनेक्ट होंगे। ताकि वेस्ट का साइकिल किया जा सके। इसके अलावा छात्रों और शिक्षकों के लिए वेबीनार और ओरिएंटेशन सेशन भी आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान ई-वेस्ट के खतरों, जिम्मेदार डिस्पोजल और अन्य मुद्दों चर्चा की जाएगी।
दूसरा फेज कब शुरू होगा?
अभियान का दूसरा फेज 1 अक्टूबर से लेकर 30 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान को करिकुलर एक्टिविटीज आयोजित की जाएगी। जिसमें इंटर हाउस पोस्टर मेकिंग, ई-वेस्ट एट इंस्टॉलेशन और निबंध लेखन इत्यादि शामिल है। छात्रों को अपने घरों में खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक्स का ऑडिट करके और माता-पिता की सहमति से उन्हें कलेक्शन प्वाइंट पर सुरक्षित रूप से जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों या क्लस्टर हब से जमा हुआ ई-वेस्ट इकट्ठा किया जाएगा। स्कूल इको क्लब को को-ऑर्डिनेटर मैट्रिक्स को इको क्लब या मिशन लाइफ पोर्टल पर लॉग कर सकते हैं। कैंपेन की ज्यादा पब्लिसिटी और आउटरेज के लिए “#SpecialCampaign6” साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रैक्टिस पोस्ट कर सकते हैं।
स्कूलों को बोर्ड ने दी ये सलाह
सीबीएसई ने सभी स्कूलों को ई-वेस्ट कलेक्शन कॉर्नर बनाने, ओरिएंटेशन प्रोग्राम और स्टूडेंट एक्टिविटीज ऑर्गेनाइज करने के की सलाह दी है। ऑथराइज्ड रीसाइकल या प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी आर्गेनाइजेशन के जरिए वेस्ट के सेफ कलेक्शन और डिस्पोजल में मदद कर सकते हैं। स्कूलों को यह सुनिश्चित करने को भी कहा गया है कि स्टूडेंट इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन डिवाइस न खोलें या डैमेज लिथियम आयन बैटरी/लीक हो रहे सेल या टूटे हुए कैथोड ट्यूब जैसी खतरनाक चीजों को न छूएँ।






