भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच मजबूत होते रिश्तों को एक नई दिशा देने के लिए UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार को दिल्ली आ रहे हैं। उनके इस दौरे को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
पिछले कुछ सालों में भारत और UAE के संबंध व्यापार, निवेश, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर रक्षा, संस्कृति और शिक्षा तक फैल चुके हैं। राष्ट्रपति नाहयान की यह यात्रा इसी साझेदारी को और व्यापक बनाने पर केंद्रित होगी।
CEPA से बदली व्यापार की तस्वीर
दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों की नींव 2022 में हुए व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) ने रखी। यह समझौता सिर्फ वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सेवाएं, निवेश और बौद्धिक संपदा का आदान-प्रदान भी शामिल है।
CEPA के तहत हजारों उत्पादों पर टैरिफ या तो खत्म कर दिया गया है या काफी कम कर दिया गया है। इसी का नतीजा है कि इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यात को UAE के बाजार में बड़ी सफलता मिली है। दोनों देशों ने 2030 तक गैर-तेल द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
भारत में UAE का बढ़ता निवेश
आंकड़े बताते हैं कि UAE भारत का सातवां सबसे बड़ा निवेशक है। साल 2000 से अब तक UAE भारत में 22 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश कर चुका है। यह निवेश ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों में हुआ है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है।
हाल ही में दोनों देशों के बीच रुपया-दिरहम में व्यापार निपटान की शुरुआत और UAE में भारत के UPI डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मिली मंजूरी ने आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई दी है। इससे व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम हो रही है और स्थानीय मुद्राओं को बढ़ावा मिल रहा है।
ऊर्जा से लेकर रक्षा तक सहयोग
UAE भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार है, जो तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंध भी लगातार मजबूत हुए हैं।
हाल ही में भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने UAE का दौरा किया था, जहां उन्होंने अपने समकक्ष से सैन्य सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों देश नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास और समुद्री सुरक्षा को लेकर सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं, जो हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता के लिए भी अहम है।





