यूनिफाइड इंटरफेस पेमेंट लेनदेन का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। इसका इस्तेमाल भारत के बाहर अन्य कई देशों में भी हो रहा है। यूपीआई से जुड़े कई बदलाव हाल ही में नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया ने किए हैं। जिसका उद्देश्य प्लेटफार्म को सुरक्षित बनाना है। प्राइवेसी को बढ़ावा देना है। सेवाओं को बेहतर बनाना और धोखाधड़ी मामलों पर लगाम लगाना है। दो नए नियम लागू होने जा रहे हैं। तारीख भी घोषित हो चुकी है। जिसकी जानकारी उपभोक्ताओं को होनी चाहिए।
लेन-देन की प्रणाली में बड़ा बदलाव होगा। अब अब UPI प्लेटफार्म पर भुगतान के दौरान प्राप्तकर्ता का निकनेस या फोन में सेव नाम नहीं दिखेगा। नए नियम 30 जून से प्रभावी हो जाएंगे। वहीं एनपीसीआई ने देश के सभी बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को 10 सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले एपीआई को कंट्रोल करने का निर्देश दिया है। इसके लिए 31 जुलाई 2025 की तारीख तय की गई है। इसका प्रभाव ओटीपे, बैलेंस चेक और अन्य सुविधाओं पर पड़ेगा। ये बदलाव 1 अगस्त से लागू होंगे।
30 जून से होने वाले बदलाव
मौजूदा समय में जब कोई यूजर यूपीआई के जरिए पेमेंट करता है तो उसके फोन पर प्राप्तकर्ता का निकनेम दिखाई देता है। जिससे फर्जी नाम और क्यूआर कोड के जरिए फ्रॉड के मामलों की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब बैंक से रजिस्टर्ड वास्तविक नाम ही दिखाई देंगे। इससे प्लेटफ़ॉर्म पहले से भी सुरक्षित होगा। 30 जून नियम लागू हो जाएंगे।
1 अगस्त से क्या-क्या बदल जाएगा?
- नए नियमों के तहत 1 अगस्त से यूपीआई यूजर्स एक दिन में ज्यादा से ज्यादा 50 बार बैलेंस चेक कर पाएंगे। यह बदलाव फोन पे, पेटीएम, गूगल पे और अन्य यूपीआई प्लेटफॉर्म पर लागू होगा। एनपीसीआई का कहना है कि बार-बार बैलेंस चेक करने से सर्वर पर लोड बढ़ता है, जिसके कारण सिस्टम स्लो हो जाता है।
- यूपीआई के जरिए ऑटोपे मेंडेट भी लिमिटेड होगा। एसआईपी, नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन आदि के भुगतान नॉन पीक आवर्स यानी सुबह 10:00 बजे से लेकर दोपहर 1:00 बजे और शाम 5:00 बजे से लेकर रात 9:30 बजे तक प्रोसेस होंगे।
- बैंक अपने ग्राहकों को ट्रांजैक्शन के बाद उपलब्ध बैलेंस की जानकारी भेजेंगे। ताकि यूजर्स बार-बार बैलेंस चेक ना करें। यदि कोई बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। एपीआई ब्लॉकिंग, जुर्माना और नए ग्राहकों की ऑन बोर्डिंग पर रोक लगा सकती है। 30 अगस्त 2025 तक बैंकों और पीएसपी को एनपीसीआई को अंडरटेकिंग देनी होगी।





