केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE की कक्षा 12वीं की गणित परीक्षा के बाद सोशल मीडिया पर एक अजीब मामला चर्चा में आ गया। छात्रों ने दावा किया कि प्रश्नपत्र पर छपे QR कोड को स्कैन करने पर यूट्यूब खुल रहा है और एक विदेशी गाना बजने लगता है। देखते ही देखते यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों के मन में भी कई सवाल खड़े हो गए।

इस मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं होने लगीं कि क्या प्रश्नपत्र की सुरक्षा में कोई गड़बड़ी हुई है। हालांकि अब CBSE ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कर दिया है कि परीक्षा के सभी प्रश्नपत्र पूरी तरह प्रामाणिक और सुरक्षित हैं। बोर्ड का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में कोई सुरक्षा चूक नहीं हुई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

CBSE गणित परीक्षा में QR कोड विवाद क्या है

यह मामला 9 मार्च 2026 को आयोजित कक्षा 12वीं की गणित परीक्षा के बाद सामने आया। कुछ छात्रों ने अपने प्रश्नपत्र पर छपे QR कोड को स्कैन किया और पाया कि वह किसी यूट्यूब वीडियो से जुड़ रहा है।

बताया गया कि जब QR कोड स्कैन किया गया तो यह प्रसिद्ध गायक रिक एस्टली के 1987 के गाने “Never Gonna Give You Up” पर रीडायरेक्ट हो गया। इंटरनेट की दुनिया में इस तरह की घटना को “रिकरोल” मीम कहा जाता है।

जैसे ही यह बात सोशल मीडिया पर आई, छात्रों और अभिभावकों के बीच सवाल उठने लगे कि क्या प्रश्नपत्र के QR कोड में कोई तकनीकी गड़बड़ी हुई है या फिर सुरक्षा से जुड़ा कोई मुद्दा सामने आया है।

CBSE ने क्या दी सफाई

इस पूरे विवाद के बाद CBSE ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए स्थिति स्पष्ट की। बोर्ड ने कहा कि कक्षा 12वीं की गणित परीक्षा के सभी प्रश्नपत्र पूरी तरह प्रामाणिक हैं और उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं हुई है।

CBSE के अनुसार प्रश्नपत्रों में लगाए गए QR कोड केवल सत्यापन और सुरक्षा के उद्देश्य से होते हैं। इन कोड का उपयोग प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता की जांच करने और किसी संभावित सुरक्षा उल्लंघन की स्थिति में तत्काल सत्यापन के लिए किया जाता है। बोर्ड ने यह भी कहा कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न हो इसके लिए आवश्यक तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं।

प्रश्नपत्रों में QR कोड क्यों लगाया जाता है

CBSE बोर्ड परीक्षाओं में सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इनमें QR कोड भी शामिल है। QR कोड का मुख्य उद्देश्य प्रश्नपत्र की पहचान और उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि करना होता है। अगर किसी प्रश्नपत्र को लेकर कोई संदेह होता है तो QR कोड के माध्यम से तुरंत उसकी जांच की जा सकती है।

इस तकनीक की मदद से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की कोशिश की जाती है। इसलिए बोर्ड ने दोहराया कि QR कोड का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।

सोशल मीडिया पर कैसे फैला मामला

यह पूरा मामला तब सामने आया जब कुछ छात्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपने प्रश्नपत्र की तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में प्रश्नपत्र पर लगे QR कोड दिखाई दे रहे थे। कुछ छात्रों ने दावा किया कि जब उन्होंने इस कोड को स्कैन किया तो वह यूट्यूब पर एक गाने के वीडियो से जुड़ गया।

एक सोशल मीडिया यूजर ने पोस्ट करते हुए लिखा कि यह उनके दोस्त का गणित का पेपर है और QR कोड स्कैन करने पर अजीब वीडियो खुल रहा है। इसके बाद यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया।

छात्रों और अभिभावकों की चिंता

इस घटना के बाद कई छात्रों और अभिभावकों को चिंता होने लगी कि कहीं प्रश्नपत्र की सुरक्षा में कोई समस्या तो नहीं है। हालांकि CBSE ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित है और सभी प्रश्नपत्र सही तरीके से वितरित किए गए थे। बोर्ड ने यह भी आश्वासन दिया कि छात्रों को इस घटना के कारण किसी भी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

CBSE बोर्ड परीक्षा की समय-सारणी

CBSE की सभी बोर्ड परीक्षाएं पारंपरिक पेन और पेपर पद्धति से आयोजित की जा रही हैं। परीक्षा का समय सभी केंद्रों पर सुबह 10:30 बजे निर्धारित किया गया है। हाल ही में बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मिडिल ईस्ट के कुछ देशों में कक्षा 12वीं की परीक्षाओं को स्थगित करने का फैसला भी लिया है। ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में होने वाली परीक्षाओं को 16 मार्च 2026 तक के लिए टाल दिया गया है।

परीक्षा प्रणाली को और मजबूत करने की तैयारी

CBSE का कहना है कि वह लगातार अपनी परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। बोर्ड तकनीकी सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की तकनीकी गड़बड़ी या भ्रम की स्थिति पैदा न हो। इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए विशेषज्ञों की मदद से तकनीकी समीक्षा भी की जा रही है।