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10वीं के बाद डॉक्टर बनने का मौका, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने लॉन्च किया 7.5 साल का खास BAMS कोर्स

Written by:Rishabh Namdev
Published:
अब 10वीं पास छात्र भी डॉक्टर बन सकेंगे। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने 'आयुर्वेद गुरुकुलम' नाम से 7.5 साल का एक खास इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू किया है। इस कोर्स के लिए NEET की अनिवार्यता नहीं होगी और इसे पूरा करने पर छात्रों को BAMS की डिग्री मिलेगी।
10वीं के बाद डॉक्टर बनने का मौका, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने लॉन्च किया 7.5 साल का खास BAMS कोर्स

डॉक्टर बनने का सपना देख रहे छात्रों के लिए एक नया रास्ता खुल गया है। अब 10वीं पास करने के बाद ही छात्र सीधे मेडिकल की पढ़ाई कर सकेंगे। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने ‘आयुर्वेद गुरुकुलम’ नाम से एक खास इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू किया है, जो छात्रों को साढ़े सात साल में आयुर्वेदिक डॉक्टर (BAMS) की डिग्री देगा। इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए 12वीं में साइंस या NEET जैसी प्रवेश परीक्षा की अनिवार्यता नहीं रखी गई है।

यह पहल उन छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में करियर बनाना चाहते हैं और जिनकी संस्कृत में अच्छी पकड़ है। इस कोर्स का उद्देश्य आयुर्वेद को उसकी मूल भाषा में बढ़ावा देना और छात्रों को प्राचीन ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक चिकित्सा की भी समझ देना है।

क्या है ‘आयुर्वेद गुरुकुलम’ कोर्स?

यह एक 7.5 साल का इंटीग्रेटेड प्रोग्राम है, जिसमें दाखिला 10वीं कक्षा के बाद मिलेगा। इस कोर्स में छात्रों को शुरू से ही संस्कृत माध्यम में आयुर्वेद के शास्त्र, ग्रंथ और चिकित्सा पद्धतियों की शिक्षा दी जाएगी। इसके साथ ही, पाठ्यक्रम में आधुनिक मेडिकल ज्ञान को भी शामिल किया गया है ताकि छात्र पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह की चिकित्सा जरूरतों को समझ सकें।

“इस कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेद को उसकी मूल भाषा और परंपरा के साथ आगे बढ़ाना है, ताकि छात्र प्राचीन ज्ञान को सही रूप में समझ सकें।” — प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेड़ी, कुलपति

कैसे होगी 7.5 साल की पढ़ाई?

इस कोर्स की कुल अवधि साढ़े सात साल है, जिसे कई चरणों में बांटा गया है। शुरुआती वर्षों में छात्रों को संस्कृत और आयुर्वेद की बुनियादी शिक्षा दी जाएगी। इसके बाद के वर्षों में प्रोफेशनल आयुर्वेदिक मेडिकल एजुकेशन पर फोकस किया जाएगा। कोर्स के अंत में इंटर्नशिप भी शामिल है, जिसे पूरा करने के बाद छात्रों को बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) की डिग्री दी जाएगी। इसके बाद वे आयुर्वेदिक डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने के पात्र होंगे।

दाखिले के लिए योग्यता और प्रक्रिया

इस कोर्स में आवेदन करने के लिए कुछ खास शर्तें रखी गई हैं:

  • छात्र का संस्कृत माध्यम से 10वीं पास होना जरूरी है।
  • उसे संस्कृत भाषा की अच्छी समझ होनी चाहिए।
  • आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में उसकी गहरी रुचि हो।

विश्वविद्यालय के अनुसार, इस कोर्स में दाखिले के लिए NEET की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, एडमिशन की पूरी प्रक्रिया, प्रवेश परीक्षा और अन्य नियम विश्वविद्यालय द्वारा अलग से तय किए जाएंगे, जिनकी घोषणा जल्द की जा सकती है।

करियर के क्या होंगे अवसर?

यह कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों के पास करियर के कई विकल्प होंगे। वे BAMS डॉक्टर बनकर अपना क्लिनिक खोल सकते हैं। इसके अलावा, सरकारी और निजी आयुर्वेदिक अस्पतालों में नौकरी कर सकते हैं। जो छात्र अकादमिक क्षेत्र में जाना चाहते हैं, वे रिसर्च और टीचिंग में भी अपना करियर बना सकते हैं। यह कोर्स छात्रों को पारंपरिक ज्ञान के साथ एक प्रोफेशनल डिग्री देता है, जिससे उनके लिए रोजगार के कई रास्ते खुल जाते हैं।