ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE Mains) के पहले सेशन का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। लाखों कैंडिडेट ऐसे हैं, जो भारत के सबसे अच्छे इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेना चाहते हैं। अगर आप भी उन स्टूडेंट्स में से एक है जो देश के टॉप NIT में एडमिशन लेना चाहते हैं तो यह जरूर सोच रहे होंगे कि इसके लिए कितने परसेंटाइल की जरूरत होगी।
हर साल लाखों छात्र JEE की परीक्षा में शामिल होते हैं और परसेंटाइल के साथ कटऑफ रैंक लगातार बदलते रहते हैं। टॉप NITs में प्रवेश के लिए 99 परसेंटाइल की जरूरत होती है। हालांकि, इससे कम स्कोर वाले स्टूडेंट्स को भी एडमिशन मिल जाता है। चलिए हम आपको देश के टॉप NITs और परसेंटाइल के बारे में बताते हैं।
कौन से हैं देश के टॉप NITs
देश के टॉप 10 NIT कॉलेज की बात करें तो तमिलनाडु का तिरुचिलापल्ली पहले नंबर पर आता है। क्वालिटी और प्लेसमेंट की वजह से यह टॉप 10 में पहले नंबर पर आता है। दूसरे नंबर पर ओडिशा का राउरकेला, तीसरी पर कर्नाटक का सूरथकल, चौथे नंबर पर तेलंगाना के वारंगल, पांचवे नंबर पर केरल का कालीकट आता है। उसके बाद पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर, असम के सिलचर, राजस्थान के जयपुर, हरियाणा के कुरुक्षेत्र और महाराष्ट्र के नागपुर में मौजूद एनआईटी को टॉप 10 में गिना जाता है।
कितना होना चाहिए परसेंटाइल
NITs में स्टूडेंट्स को कैटेगरी वाइज और ब्रांच के आधार पर मुख्य तौर पर JEE Main स्कोर और JoSSA यानी जॉइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी काउंसलिंग के आधार पर एडमिशन दिया जाता है। जनरल, ओबीसी और अन्य कैटेगरी के लिए कटऑफ और परसेंटाइल हर साल बदलता है। आमतौर पर 99 और 99+ परसेंटाइल की जरूरत होती है।
जिन स्टूडेंट का स्कोर 99 या उससे ज्यादा है उन्हें एनआईटी त्रिचि, वारंगल, कालीकट, राउरकेला में CSE, ME, CE, ECE जैसी ब्रांच मिल सकती है। 98 से 99 परसेंटाइल वाले छात्रों को कोर ब्रांच के अलावा दूसरी ब्रांच मिल सकती है।
कैटेगरी के हिसाब से परसेंटाइल
अगर कैटेगरी के हिसाब से टॉप NITs का परसेंटाइल देखें तो जनरल कैटेगरी के लिए आमतौर पर 99 या उससे ज्यादा परसेंटाइल रखा जाता है। EWS के लिए संभावित परसेंटाइल 78 से 83, ओबीसी के लिए 77 से 81, SC के लिए 57 से 61, ST के लिए 51 से 54 देखने को मिलता है, हालांकि इनमें हर साल बदलाव देखने को मिलता है।
कैसे मिलता है एडमिशन
NITs में एडमिशन के लिए केवल परसेंटाइल नहीं अन्य फैक्टर भी मौजूद हैं। इसमें ST, SC, OBC, EWS कैटेगरी रिजर्वेशन, होम स्टेट कोटा से लेकर काउंसलिंग राउंड में सीट की उपलब्धता शामिल है। कोई ब्रांच ऐसी है जिसमें कम कंपटीशन है तो उसकी क्लोजिंग रैंकिंग कम भी रखी जा सकती है। हर साल कट ऑफ में कंपटीशन लेवल के हिसाब से परिवर्तन आता है।





