बदलेगी छतरपुर की खेती की किस्मत, केन-बेतवा परियोजना से खेतों तक पहुंचेगा भरपूर पानी

केंद्र सरकार ने छतरपुर के किसानों के लिए बड़ी राहत देते हुए केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत लेफ्ट बैंक कैनाल को मंजूरी दी है। 90% खर्च केंद्र उठाएगा, जिससे सूखे से जूझ रहे लाखों किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।
केन-बेतवा परियोजना

छतरपुर और बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों के लिए पानी हमेशा सबसे बड़ी चिंता रहा है। कई गांवों में किसान आज भी बारिश पर निर्भर खेती करते हैं। कम बारिश होने पर फसल खराब होती है और पूरे साल की मेहनत पर पानी फिर जाता है। लेकिन अब इस तस्वीर में बड़ा बदलाव आने वाला है।

केंद्र सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत छतरपुर जिले में लेफ्ट बैंक कैनाल यानी एलबीसी सिंचाई परियोजना को मंजूरी दे दी है। इससे करीब 1.39 लाख हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई संभव होगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली सबसे बड़ी योजनाओं में से एक मानी जा रही है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना

केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है। इसका मुख्य उद्देश्य केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाना है, ताकि पानी की कमी से जूझ रहे इलाकों को राहत मिल सके।

इस परियोजना में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों की भागीदारी है, जबकि मुख्य वित्तीय सहयोग केंद्र सरकार द्वारा दिया जा रहा है। छतरपुर में स्वीकृत एलबीसी परियोजना इसी बड़े प्लान का अहम हिस्सा है।

इस योजना के तहत दौधन बांध से नहर और पाइपलाइन के माध्यम से पानी खेतों तक पहुंचाया जाएगा। खास बात यह है कि इसमें आधुनिक सूक्ष्म सिंचाई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे पानी की बर्बादी कम होगी और हर खेत तक पर्याप्त पानी पहुंच सकेगा।

छतरपुर के किसानों को कैसे मिलेगा सीधा फायदा?

छतरपुर जिले का बड़ा हिस्सा वर्षा आधारित खेती पर निर्भर रहा है। पानी की कमी के कारण कई बार किसान एक ही फसल पर निर्भर रहते हैं। लेकिन एलबीसी परियोजना शुरू होने के बाद स्थिति बदलने की उम्मीद है। करीब 1.39 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलने से किसान साल में दो या तीन फसलें उगा सकेंगे। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और खेती स्थिर बनेगी। इसके अलावा सिंचाई सुविधा मिलने से गेहूं, चना, दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती भी बढ़ेगी। इससे किसानों को स्थानीय बाजार के साथ बड़े बाजारों में भी बेहतर दाम मिल सकेंगे। ग्रामीण युवाओं को भी खेती और कृषि आधारित कामों में रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

केंद्र सरकार उठाएगी 90% भार

इस परियोजना की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसके निर्माण का 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाएगी, जबकि केवल 10 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इससे राज्य पर आर्थिक दबाव कम होगा और परियोजना को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी। जल संसाधन विभाग के अनुसार सर्वे का काम पहले ही पूरा हो चुका है और अब निर्माण कार्य के लिए जल्द टेंडर जारी किए जाएंगे। इसका मतलब है कि जमीन पर काम शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा।

आधुनिक तकनीक से होगी सिंचाई

इस परियोजना में भूमिगत दबाव पाइपलाइन का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे खुले नहरों की तरह पानी रास्ते में बर्बाद नहीं होगा। किसानों के खेतों तक पाइप के जरिए सीधे पानी पहुंचाया जाएगा। इससे पानी की बचत होगी और सिंचाई अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक आने वाले समय में पूरे देश में सिंचाई का नया मॉडल बन सकती है।

10 जिलों को मिलेगा फायदा

केन-बेतवा लिंक परियोजना का फायदा केवल छतरपुर तक सीमित नहीं रहेगा। इस योजना से मध्य प्रदेश के कई जिलों में सिंचाई सुविधा मजबूत होगी। इन जिलों में छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा और सागर शामिल हैं। करीब 8.1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलने से लगभग 44 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। यह पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।

ब्यामरा सिंचाई परियोजना भी आगे बढ़ रही

एलबीसी परियोजना से पहले केंद्र सरकार ब्यामरा सिंचाई परियोजना को भी मंजूरी दे चुकी है। इसमें फिलहाल सर्वे कार्य चल रहा है और जल्द निर्माण प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। इस परियोजना के पूरा होने पर पन्ना और दमोह जिलों के लगभग ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। सरकार का कहना है कि विभिन्न परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से मंजूरी दी जा रही है ताकि पूरे क्षेत्र में पानी की समस्या को स्थायी रूप से हल किया जा सके।

Bhawna Choubey
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