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छतरपुर: सरकारी स्कूलों में आवारा कुत्तों पर लगेगी रोक, DEO ने प्राचार्यों को सौंपी निगरानी की जिम्मेदारी

Written by:Banshika Sharma
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छतरपुर जिला शिक्षा अधिकारी ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए एक अनोखा आदेश जारी किया है। इसके तहत अब स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों का प्रवेश रोकने की पूरी जिम्मेदारी प्राचार्यों और प्रधानाध्यापकों की होगी। हर स्कूल में निगरानी के लिए एक विशेष दल भी बनाया जाएगा।
छतरपुर: सरकारी स्कूलों में आवारा कुत्तों पर लगेगी रोक, DEO ने प्राचार्यों को सौंपी निगरानी की जिम्मेदारी

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने एक अहम आदेश जारी किया है, जो अब चर्चा का विषय बन गया है। 21 जनवरी 2026 को जारी इस आदेश के मुताबिक, अब सरकारी स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों को घुसने से रोकने की सीधी जिम्मेदारी स्कूल के प्राचार्य और प्रधानाध्यापकों पर होगी।

यह आदेश जिले के सभी शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों के लिए तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस कदम से बच्चों के साथ होने वाली किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सकता है।

छात्रों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि आवारा कुत्तों के स्कूल परिसर में घूमने से बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसी आशंका को देखते हुए विद्यालय प्रमुखों को विशेष सतर्कता बरतने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी आवारा जानवर परिसर में प्रवेश न कर पाए।

छात्रों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता

हर स्कूल में बनेगा विशेष निगरानी दल

आदेश के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक ठोस व्यवस्था भी बनाई गई है। इसके तहत प्रत्येक विद्यालय को अपने स्तर पर एक विशेष निगरानी दल का गठन करना होगा। यह दल रोजाना स्कूल परिसर का निरीक्षण करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि कैंपस पूरी तरह से सुरक्षित और आवारा कुत्तों से मुक्त है। आदेश में इस दल द्वारा नियमित मॉनिटरिंग और निर्देशों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया गया है।

प्राचार्य होंगे नोडल अधिकारी

इस नए नियम के बाद अब प्राचार्यों की भूमिका केवल शैक्षणिक कार्यों तक ही सीमित नहीं रहेगी। उन्हें स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का भी जिम्मा संभालना होगा। आदेश में प्राचार्यों और प्रधानाध्यापकों को इस कार्य के लिए नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया है।

आदेश की एक प्रतिलिपि छतरपुर कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और सागर संभाग के संभागीय संयुक्त संचालक (लोक शिक्षण) को भी सूचना के लिए भेजी गई है, ताकि वरिष्ठ स्तर पर भी इसकी जानकारी रहे। फिलहाल जिले के सभी सरकारी स्कूलों में इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

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Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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