पुलिस की कला प्रतियोगिता में हिस्सा लेने उत्साहित दिखे बच्चे, अब तक 250 प्रतिभागियों ने भेजे आवेदन

पुलिस की कला प्रतियोगिता में हिस्सा लेने उत्साहित दिखे बच्चे, अब तक 250 प्रतिभागियों ने भेजे आवेदन

छतरपुर, संजय अवस्थी| समाज में पुलिस (Police) की छवि के प्रति सकारात्मक माहौल निर्मित करने एवं कोरोना महामारी (Corona) के बीच घर पर बैठे बच्चों के कौशल विकास में सहायता करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा (SP Sachin Sharma) के निर्देश पर शुरू की गई पुलिस कला प्रतियोगिता (Police art competition) में जिले के विद्यार्थी जमकर उत्साह दिखा रहे हैं। पेंटिंग, कविता, निबंध, एक्टिंग जैसी कलाओं में आवेदन करने के लिए अब इस प्रतियोगिता की तारीख को बढ़ाकर 5 दिसम्बर कर दिया गया है। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए अब तक 250 विद्यार्थी आवेदन कर चुके हैं।

प्रतियोगिता के नोडल अधिकारी एएसपी समीर सौरभ एवं आयोजन का नेतृत्व कर रहीं महिला प्रकोष्ठ की उप पुलिस अधीक्षक अनुरक्ति साबनानी ने बताया कि प्रतियोगिता में आवेदन करने के लिए टेलीफोन या वाट्सएप से मोबाइल नंबर 7049120554 या ईमेल आईडी डीएसपी डॉट वूमेनसेल-सीएचपी अल्ट एमपी पुलिस डॉट जीओवी डॉट इन पर संपर्क कर सकते हैं। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए चार समूह बनाए गए हैं। प्रथम समूह में 1 से 5वीं तक के बच्चे शामिल हैं।

समूह क्रमांक 2 में 6वीं से 8वीं तक व समूह क्रमांक 3 में 9वीं से 10वीं तक के विद्यार्थी शामिल होंगे एवं चौथे समूह में 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों को रखा गया है। विद्यार्थियों को ऊपर दिए गए नंबर पर संपर्क कर अपने समूह के आधार पर दिए गए विषय के मुताबिक अपनी कला से जुड़ा वीडियो 5 दिसम्बर की शाम 5 बजे तक भेजना है। चुने हुए तीन विद्यार्थियों को प्रथम पुरस्कार के रूप में 2000 रूपए, द्वितीय पुरस्कार के रूपए में 1500 रूपए, तृतीय पुरस्कार के रूप में 1000 रूपए की राशि दी जाएगी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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