केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बवाल: छतरपुर में प्रभावित परिवार आमरण अनशन पर, मुआवजे की मांग तेज

छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी और ग्रामीण परिवारों का आंदोलन तेज हो गया है। आमरण अनशन के बीच मुआवजा, पुनर्वास और सरकारी वादों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बवाल: छतरपुर में प्रभावित परिवार आमरण अनशन पर, मुआवजे की मांग तेज

मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों का विरोध अब बड़े आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। कई आदिवासी और ग्रामीण परिवार आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों पहले विस्थापन होने के बावजूद उन्हें आज तक पूरा मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला।

प्रदर्शन में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में शामिल हैं। आंदोलन कर रहे लोगों का कहना है कि उन्होंने विकास परियोजना के लिए अपनी जमीन और घर छोड़े लेकिन बदले में उन्हें न तो तय आर्थिक सहायता मिली और न ही रहने और रोजगार की स्थायी व्यवस्था की गई। इसी वजह से अब उन्होंने आंदोलन को तेज करने का फैसला लिया है।

मुआवजा और पुनर्वास बना सबसे बड़ा मुद्दा

आंदोलन कर रहे परिवारों का दावा है कि सरकार ने प्रत्येक पात्र परिवार को 10 लाख से 12.50 लाख रुपये तक की सहायता और जमीन या आवास का विकल्प देने का भरोसा दिया था। लेकिन उनका आरोप है कि कई परिवारों को बेहद कम राशि मिली, जबकि कुछ परिवार अब भी पूरी तरह राहत पैकेज से वंचित हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 638 अतिरिक्त परिवारों को पुनर्वास योजना के लिए पात्र माना गया था, लेकिन उन्हें अब तक कोई ठोस लाभ नहीं मिला।

केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बवाल: छतरपुर में प्रभावित परिवार आमरण अनशन पर, मुआवजे की मांग तेज
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़ी विकास परियोजना की सफलता केवल निर्माण कार्य पर नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों के न्यायसंगत पुनर्वास पर भी निर्भर करती है। यदि लोगों को समय पर उचित मुआवजा, रोजगार के अवसर और बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो ऐसे विवाद लंबे समय तक चलते रहते हैं। यही वजह है कि केन-बेतवा परियोजना के साथ अब पुनर्वास का मुद्दा भी प्रमुख चर्चा का विषय बन गया है। प्रभावित परिवार चाहते हैं कि उनकी मांगों की निष्पक्ष जांच हो और पात्र लोगों को जल्द राहत दी जाए।

भोपाल में गरमाई सियासत

छतरपुर का यह आंदोलन अब राजधानी भोपाल की राजनीति तक पहुंच गया है। कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि सरकार प्रभावित परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पीड़ितों के साथ खड़ी है और जरूरत पड़ने पर मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा। वहीं समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने भी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और कहा कि विस्थापित परिवारों को सम्मानजनक पुनर्वास मिलना चाहिए।

दूसरी ओर बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता कल्पेश ठाकुर ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि सरकार प्रभावित परिवारों से लगातार बातचीत कर रही है और जिन मामलों में समाधान की जरूरत है, वहां प्रशासन आवश्यक कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं को रोकने के बजाय समस्याओं का समाधान संवाद के जरिए होना चाहिए। फिलहाल प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन आमरण अनशन के चलते पूरे मामले पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में सरकार की अगली पहल और आंदोलन की दिशा इस विवाद का भविष्य तय कर सकती है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
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