छतरपुर जिले में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर वाहन पर लाल-नीली बत्ती लगाने का मामला सामने आया है। जिला कोषालय अधिकारी (DTO) विनोद श्रीवास्तव की गाड़ी पर नियमों के विरुद्ध लगी लाल-नीली बत्ती को परिवहन विभाग ने जब्त कर लिया है। मौके पर एसडीएम भी पहुंचे और संबंधित वाहन पर चलानी कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार..अधिकारी की गाड़ी पर लगी लाल-नीली बत्ती को लेकर पिछले कुछ दिनों से शहर में चर्चा थी। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें सामने आई और इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह बत्ती सार्वजनिक स्थानों पर ‘रोब’ दिखाने के तौर पर उपयोग की जा रही थी।
नियमों के विरुद्ध गाड़ी पर लगाई लाल-नीली बत्ती
छतरपुर में वीआईपी कल्चर का मामला सामने आया है। यहां जिला कोषालय अधिकारी विनोद श्रीवास्तव अपनी गाड़ी पर लाल-नीली बत्ती लगाकर शहर में घूम रहे थे, जो केंद्र और राज्य सरकार के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। सोशल मीडिया पर यह मामला वायरल होने के बाद प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारी की गाड़ी से बत्ती जप्त कर ली गई। साथ ही चलानी कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है।
परिवहन विभाग ने की कार्रवाई
ये मामला सामने आने पर परिवहन विभाग के अधिकारी और एसडीएम मौके पर पहुंचे। उन्होंने गाड़ी से लाल-नीली बत्ती को तत्काल जप्त कर लिया और नियम उल्लंघन के लिए चलानी प्रक्रिया शुरू कर दी। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस बारे में सूचना मिलने पर बत्ती को निकलवा दिया गया है और बत्ती को जब्त करवाकर आरटीओ के माध्यम से चालानी कार्रवाई की गई है।
जानिए क्या है कानून
बता दें कि भारत में वाहनों पर लाल-नीली बत्ती लगाने के नियम 2017 से बहुत सख्त हो चुके हैं। केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए 1 मई 2017 से लाल बत्ती पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद अब राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी व्यक्ति को अपनी गाड़ी पर लाल बत्ती लगाने की अनुमति नहीं है। यह सुविधा सिर्फ आपातकालीन सेवाओं तक सीमित कर दी गई है। एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस की विशेष गाड़ियां ही बहुरंगी या नीली बत्तियां इस्तेमाल कर सकती हैं और वो भी सिर्फ इमरजेंसी या ड्यूटी के दौरान। किसी भी निजी व्यक्ति, जिला स्तर के अधिकारी जैसे डीएम, डीटीओ या नेता को लाल, नीली या किसी भी प्रकार की फ्लैश लाइट लगाने का कोई अधिकार नहीं है। मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में “हूटर हटाओ” जैसे अभियान भी चलाए गए जिनमें निजी और सरकारी गाड़ियों पर अवैध लाल-नीली-पीली फ्लैश लाइट, हूटर और वीआईपी स्टीकर के खिलाफ विशेष कार्रवाई की गई।





