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बालोद जंबूरी में राजस्थान दिवस की धूम, संस्कृति से लेकर एडवेंचर तक दिखा युवा जोश

Written by:Bhawna Choubey
Published:
छत्तीसगढ़ के बालोद में चल रही नेशनल रोवर-रेंजर जंबूरी के दूसरे दिन राजस्थान दिवस ने आयोजन को खास बना दिया। लोक संस्कृति, पारंपरिक व्यंजन और सुरक्षित एडवेंचर गतिविधियों के जरिए बच्चों और युवाओं ने अनुशासन, सीख और सांस्कृतिक मेलजोल का अनुभव किया।
बालोद जंबूरी में राजस्थान दिवस की धूम, संस्कृति से लेकर एडवेंचर तक दिखा युवा जोश

बालोद की धरती इन दिनों सिर्फ एक आयोजन की मेजबानी नहीं कर रही, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आई संस्कृतियों को जोड़ने का काम भी कर रही है। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के रोवर-रेंजर्स का राष्ट्रीय स्तर का कैंप, नेशनल रोवर-रेंजर जंबूरी 9 से 13 जनवरी 2026 आयोजित किया जा रहा है।

जंबूरी के दूसरे दिन का नज़ारा खास रहा। राजस्थान से आए रोवर-रेंजर्स ने राजस्थान दिवस मनाकर पूरे परिसर को रंग, परंपरा और उत्साह से भर दिया। मंच पर लोक संस्कृति की झलक दिखी, तो मैदान में बच्चों और युवाओं ने कैंपिंग व एडवेंचर गतिविधियों का भरपूर आनंद लिया। यह दिन सिर्फ मनोरंजन का नहीं, बल्कि सीख, अनुशासन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी रहा।

बालोद जंबूरी में राजस्थान दिवस का भव्य आयोजन

जंबूरी के दूसरे दिन राजस्थान से पहुंचे रोवर, रेंजर्स और स्टाफ ने पारंपरिक अंदाज़ में राजस्थान दिवस मनाया। रंग-बिरंगी वेशभूषा, लोक संगीत और राजस्थानी नृत्यों ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। मंच से प्रस्तुत लोकगीतों और नृत्यों ने दर्शकों को बांधे रखा।

आयोजकों के अनुसार, इस दिन का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति देना नहीं था, बल्कि अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिभागियों के बीच आपसी समझ और सम्मान को बढ़ाना भी था। राजस्थान से आए प्रतिभागियों ने अपने पारंपरिक व्यंजन भी लोगों के लिए रखे। मूंग की रबड़ी सहित कई राजस्थानी मिठाइयों और व्यंजनों को लोगों ने चखा और सराहा। यह भोजन सिर्फ स्वाद का नहीं, बल्कि संस्कृति को जानने-समझने का माध्यम बना।

कैंपिंग और एडवेंचर गतिविधियों ने बढ़ाया रोमांच

जंबूरी परिसर में बच्चों और युवाओं के लिए अलग-अलग कैंपिंग ज़ोन बनाए गए हैं। यहां उन्हें खुले वातावरण में रहने, टीमवर्क सीखने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। आयोजकों के अनुसार, कैंपिंग का मकसद बच्चों को अनुशासन और जिम्मेदारी का व्यावहारिक अनुभव देना है।

एडवेंचर गतिविधियों में जिपलाइन, घुड़सवारी, रैपलिंग और टायर-चिमनी जैसी एक्टिविटीज कराई जा रही हैं। इसके अलावा, प्रशिक्षकों की निगरानी में टारगेट शूटिंग भी कराई गई, जिससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा। सभी गतिविधियां पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था और प्रशिक्षित स्टाफ की देखरेख में कराई जा रही हैं।

महिला गाइड्स और लीडर्स की अहम भूमिका

जंबूरी में महिला गाइड्स और लीडर्स की भूमिका भी काफी अहम है। कई एडवेंचर और ट्रेनिंग गतिविधियों की जिम्मेदारी महिला प्रशिक्षकों के पास है। रैपलिंग सहित विभिन्न गतिविधियों की जिम्मेदारी संभाल रहीं गाइड मधुलिका ने बताया कि बच्चे बेहद उत्साहित हैं और नई-नई चीजें सीख रहे हैं।

गाइड्स के अनुसार, इस तरह के आयोजन बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर जीवन कौशल सीखने का मौका देते हैं। टीमवर्क, अनुशासन, नेतृत्व और आत्मविश्वास जैसे गुण ऐसे कैंपों के जरिए स्वाभाविक रूप से विकसित होते हैं। महिला गाइड्स की मौजूदगी से खासतौर पर बालिकाओं में भी आत्मविश्वास देखने को मिल रहा है।

राजस्थान से आए प्रतिभागियों ने बनाया खास माहौल

दल के अनुसार, राजस्थान से बड़ी संख्या में रोवर-रेंजर्स और स्टाफ इस जंबूरी में शामिल हुए हैं। सभी ने मिलकर ऐसा माहौल बनाया कि बालोद में राजस्थान की झलक साफ दिखाई दी। पारंपरिक पोशाक, लोक संगीत और व्यंजनों ने आयोजन को और रंगीन बना दिया।

राजस्थान से आए प्रतिभागी गोलू शर्मा ने बताया कि मूंग की रबड़ी सहित पारंपरिक व्यंजन लोगों के सामने रखे गए, जिन्हें सभी ने पसंद किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों के लोगों के साथ अपनी संस्कृति साझा करना उनके लिए यादगार अनुभव है।

सीख, अनुशासन और सांस्कृतिक मेलजोल

आयोजकों के मुताबिक, नेशनल रोवर-रेंजर जंबूरी का मकसद सिर्फ एक कैंप लगाना नहीं है। इसका उद्देश्य युवाओं और बच्चों को अनुशासन, सेवा भावना और सांस्कृतिक विविधता का सम्मान सिखाना है। अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिभागी यहां रहकर एक-दूसरे की जीवनशैली, खान-पान और परंपराओं को करीब से समझते हैं। बालोद में चल रहा यह आयोजन न सिर्फ छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए एक सीखने का मंच बन गया है।