छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मंगलवार को हुए दर्दनाक रेल हादसे के बाद राज्य में शोक का माहौल है। इस हादसे में अब तक 11 यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 20 लोग घायल हुए हैं। हादसा बिलासपुर रेलवे स्टेशन के पास उस समय हुआ, जब एक पैसेंजर मेमू ट्रेन और मालगाड़ी की टक्कर हो गई। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, दुर्घटना 4 नवंबर 2025 की दोपहर में हुई और राहत-बचाव कार्य देर रात तक जारी रहा।
घायलों से मिले नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत
बुधवार को नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत सिम्म अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। इस दौरान महंत ने केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रेल मंत्री के हाथ बंधे हैं और उन्हें स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दिया जा रहा है। महंत ने आरोप लगाया कि हादसे की असली जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है और उन्हें इस लापरवाही के लिए इस्तीफा देना चाहिए।
महंत ने आगे कहा कि हादसे में मौत के सही आंकड़े छुपाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, मृतकों की संख्या 20 तक पहुंच चुकी है, लेकिन प्रशासन वास्तविक संख्या बताने से बच रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति प्रशासन में आम हो गई है ताकि मुआवजे की राशि कम दी जा सके। महंत ने यह भी कहा कि रेलवे, कोयला और अन्य खनिजों से जुड़ी मालगाड़ियों को प्राथमिकता दे रहा है, जिसके चलते पैसेंजर ट्रेनों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है और इस तरह के हादसे बार-बार हो रहे हैं।
चरणदास महंत ने उठाई ये मांग
उन्होंने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने के साथ-साथ परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की। महंत ने कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने घायलों के बेहतर इलाज के लिए भी राज्य सरकार से अनुरोध किया।
रेलवे प्रशासन ने इस दुर्घटना में मारे गए यात्रियों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। गंभीर रूप से घायलों को 5-5 लाख रुपये और मामूली रूप से घायलों को 1-1 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। प्रशासन ने बताया कि राहत और मरम्मत कार्य पूरी रात चलाया गया और ट्रैक को जल्द बहाल करने की कोशिशें जारी हैं।





