छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) 2020-2021 भर्ती घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। रिटायर्ड IAS जीवनलाल ध्रुव, उनकी बेटी निशा कोसले, बेटे सुमित ध्रुव, पूर्व परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और दीपा आदिल को गिरफ्तार किया गया है। इन सभी को विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में भेज दिया गया। इस मामले में पहले भी सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें CGPSC के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और बजरंग पावर एंड इस्पात के पूर्व निदेशक श्रवण कुमार गोयल शामिल हैं।
यह घोटाला CGPSC की 2020-2022 भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें प्रभावशाली नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के रिश्तेदारों को डिप्टी कलेक्टर, DSP जैसे पदों पर गलत तरीके से चयनित करने का आरोप है। जांच में पता चला कि श्रवण कुमार गोयल ने अपने बेटे शशांक गोयल और बहू भूमिका कटियार को डिप्टी कलेक्टर बनवाने के लिए टामन सिंह सोनवानी को 45 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। इस रिश्वत को दो किश्तों में ग्रामीण विकास समिति के माध्यम से दिया गया।
48 मामलों में कार्रवाई की मांग
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस घोटाले की शिकायतें सामने आने के बाद 48 मामलों में कार्रवाई की मांग की गई थी। BJP के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर ने इस मामले को राज्यपाल के समक्ष उठाया था, जिसके बाद EOW/ACB को जांच के आदेश दिए गए। 2023 के विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा जोर-शोर से उठा। BJP नेताओं ने CBI जांच का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद विष्णुदेव साय सरकार ने 3 जनवरी 2024 को इसकी जांच CBI को सौंप दी।
कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद
CBI ने जांच के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120B, 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 व 2018 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। वर्तमान में यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और सभी आरोपी जेल में सजा काट रहे हैं।





