छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की मुश्किलें और गहरा गई हैं। रायपुर की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनकी पेशी के बाद उनकी न्यायिक हिरासत को 15 सितंबर तक बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि ED इस तारीख को मामले में चार्जशीट दाखिल कर सकती है। कांग्रेस नेता इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रहे हैं और केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार पर लगातार हमलावर हैं।
चैतन्य बघेल ने अपनी गिरफ्तारी और हिरासत को गैरकानूनी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने ED की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील करने की सलाह दी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 25 अगस्त को उनकी याचिका को खारिज करते हुए कहा कि राहत के लिए उन्हें केवल अपने मामले से संबंधित नया आवेदन दाखिल करना होगा। चैतन्य ने EOW की जांच रिपोर्ट की वैधता को भी चुनौती दी थी, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
ED की जांच में बड़ा खुलासा
ED ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को उनके जन्मदिन पर भिलाई स्थित आवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला कि शराब घोटाले से 3200 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई, जिसमें से चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपये की राशि मिली। ED का दावा है कि चैतन्य ने इस राशि को अपनी रियल एस्टेट फर्मों के जरिए मिलाया और अपने प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल किया। उन्होंने ठेकेदारों को नकद भुगतान और बैंक प्रविष्टियों के माध्यम से इन फंड्स का उपयोग किया।
त्रिलोक सिंह ढिल्लो के साथ साजिश
ED की जांच में यह भी सामने आया कि चैतन्य बघेल ने त्रिलोक सिंह ढिल्लो के साथ मिलकर एक योजना बनाई, जिसमें ढिल्लो के कर्मचारियों के नाम पर “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैट खरीदने की आड़ में 5 करोड़ रुपये अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त किए। बैंकिंग रिकॉर्ड से पता चलता है कि इस दौरान ढिल्लो को शराब सिंडिकेट से भारी भुगतान मिला था। इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा सहित कई अन्य लोग भी जेल में हैं। कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश बता रही है, जबकि ED का कहना है कि यह घोटाला राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने वाला है।





