छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 21 अगस्त से अपने पहले विदेशी दौरे पर जापान और साउथ कोरिया रवाना होंगे। 10 दिनों की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में निवेश को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री अपने दल के साथ दोनों देशों के सरकारी प्रतिनिधिमंडल और बिजनेस कम्युनिटी के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे, ताकि राज्य में नई औद्योगिक नीति के तहत निवेश के अवसर तलाशे जा सकें। इस दौरे में न्यू स्टार्टअप, स्मार्ट सिटी, ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पहले से ही सवा छह लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। मुख्यमंत्री की इस यात्रा का लक्ष्य नई उद्योग नीति के तहत और अधिक निवेश आकर्षित करना है। साय जापान और साउथ कोरिया में वहां की अग्रणी कंपनियों और निवेशकों को छत्तीसगढ़ में कारोबारी अवसरों के बारे में जानकारी देंगे। यह दौरा राज्य की आर्थिक प्रगति को गति देने और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू
हालांकि, मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस यात्रा को ‘राजनीतिक पर्यटन’ करार देते हुए सरकार पर निशाना साधा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि यह दौरा सरकार की नाकामियों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में मौजूदा उद्योगों का संचालन भी ठीक से नहीं हो रहा, और कई कारखाने बंद होने की कगार पर हैं। कांग्रेस ने इस दौरे को अनावश्यक बताते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस की मानसिकता ‘गुलामों जैसी’
इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया है। भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने पूछा कि क्या कांग्रेस शासनकाल में उनके नेता और मंत्री विदेश यात्राएं नहीं करते थे? उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी की विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस की मानसिकता को ‘गुलामों जैसी’ बताया। मिश्रा ने कहा कि देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हो चुका है और कांग्रेस को अपनी सोच बदलनी चाहिए। यह विवाद दौरे से पहले राज्य की सियासत को गरमा रहा है।





