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छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत: कमलनाथ ने की पूरे प्रदेश में कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाने की मांग, कहा “सभी दवाओं की जांच हो”

Written by:Shruty Kushwaha
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पूर्व सीएम ने बच्चों की मौत को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला किया और कहा कि मध्यप्रदेश सरकार का ध्यान जनता की जान पर नहीं, बल्कि ठेकेदारी और कमीशनखोरी पर है। उन्होंने दवाओं की खरीद और अस्पताल व्यवस्थाओं में पैसों के खेल का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते दोषपूर्ण दवा पर रोक लगाई जाती तो बच्चों की यह मौतें टाली जा सकती थी।
छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत: कमलनाथ ने की पूरे प्रदेश में कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाने की मांग, कहा “सभी दवाओं की जांच हो”

Kamal Nath

छिंदवाड़ा जिले में पिछले 15 दिनों में छह मासूम बच्चों की किडनी फेलियर से दर्दनाक मौत के मामले ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इन मौतों का मुख्य कारण एक कफ सिरप हो सकता है, जिसके सेवन से बच्चों की सेहत बिगड़ी। लेकिन इस कफ सिरप को फिलहाल सिर्फ छिंदवाड़ा में ही बैन किया गया है, जबकि प्रदेश के अन्य स्थानों पर उसकी बिक्री जारी है।

इसे लेकर अब कमलनाथ ने प्रदेश सरकार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि संदिग्ध कफ सिरप पर सिर्फ छिंदवाड़ा में ही प्रतिबंध न लगाया जाए बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में उसपर तत्काल रोक लगाई जाए। उन्होंने मांग की कि “प्रदेश में बिक रही अन्य दवाओं की भी पूरी जांच की जाए ताकि प्रदेश की जनता को दवा के नाम पर मिल रहे ज़हर से बचाया जा सके।”

कमलनाथ ने की कफ सिरप पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग 

छिंदवाड़ा में किडनी फेलियर से बच्चों की मौत को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि “छिंदवाड़ा में जिस कफ सिरप पीने से छह बच्चों की किडनी फ़ेल होने से मृत्यु की दुखद घटना हुई थी, उस सिरप पर छिंदवाड़ा में प्रतिबंध लगाया गया है और बाक़ी प्रदेश में कोई रोक नहीं लगायी गई है। मैं सरकार से माँग करता हूँ कि यह अत्यंत लापरवाही का मामला है। अगर सरकार को प्रथम दृष्ट्या लगता है कि ये सिरप बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है तो उस पर छिंदवाड़ा ही नहीं पूरे प्रदेश में रोक लगायी जानी चाहिए।”

पूर्व सीएम ने कहा कि बच्चों के लिए जानलेवा सिरप के मामले में भी मध्य प्रदेश प्रशासन का रवैया खानापूर्ति करने जैसा है। उन्होंने कहा कि मैं माँग करता हूँ कि प्रदेश में बिक रही अन्य दवाओं की सख़्ती से जाँच की जाए ताकि प्रदेश की जनता को दवा के नाम पर मिल रहे ज़हर से बचाया जा सके।

अन्य दवाओं की जांच की मांग भी की

छिंदवाड़ा में यह सिलसिला 24 अगस्त को शुरू हुआ, जब स्थानीय बच्चों में खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ की शिकायतें बढ़ने लगीं। प्रारंभ में इसे मौसमी वायरल संक्रमण माना गया, लेकिन 7 सितंबर को पहली मौत के बाद हालात बिगड़ते चले गए। 4 से 26 सितंबर के बीच पांच और बच्चे किडनी फेलियर का शिकार होकर दम तोड़ चुके थे। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि सभी प्रभावित बच्चों ने एक ही ब्रांड के कफ सिरप का सेवन किया था। इसके बाद जिले में उस कफ सिरप पर प्रतिबंध लगाया गया है लेकिन प्रदेश के अन्य स्थानों पर अब भी उसकी बिक्री हो रही है। कांग्रेस नेता ने उस सिरप को पूरे प्रदेश में बैन करने की मांग की है साथ ही ये भी कहा है कि अन्य दवाओं की भी पूरी जांच की जाए।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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