सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ- ”देवास जीतेगा, कोरोना हारेगा”

सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ- ”देवास जीतेगा, कोरोना हारेगा”

देवास।अमिताभ शुक्ला।

देवास में सोशल मीडिया पर पिछले दिनों देवास जीतेगा कौन हारेगा नाम से है स्टेप रविवार को ट्विटर पर जारी करने की अपील की गई थी , जिसका असर यह हुआ कि 50 हजार से ज्यादा लोगों ने ट्विटर पर इस पर ट्वीट किया और रविवार को सुबह 11:00 बजे ही या ट्वीट देशभर में सेकंड नंबर पर ट्रेंड करने लगा । इस ट्वीट पर अनेक जनप्रतिनिधियों देवास विधायक गायत्री राजे पवार , सांसद महेंद्र सोलंकी सहित बीजेपी जिला अध्यक्ष और अन्य कई जनप्रतिनिधियों ने ट्वीट किया और अपना योगदान दिया । पूरे मामले को लेकर देवास सांसद महेंद्र सोलंकी ने कहा कि हैशटैग पर देवास के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा देवास जीतेगा कोरोना हारेगा नाम से अपील जारी की गई थी , जिसके बाद रविवार दोपहर 11:00 बजे हेशटेग पूरे इंडिया में पॉपुलर हुआ है , जिसके कारण देवास से एक अच्छा संदेश भी कोरोना को लेकर गया है और देवास के लोगों की इच्छाशक्ति भी देखने को मिलती है । साथ ही देवास सांसद ने कहा कि लोग अपने घरों में रह रहे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें । हम सभी को मिलकर कोरोनावायरस को हराना है । उन्होंने यह भी कहा की प्रशासन को भी आवश्यक निर्देश उनके द्वारा दिए जा रहे हैं , जो भी आवश्यक कदम होंगे और जो भी जरूरत होगी । उन सभी को वे जनप्रतिनिधि होने के नाते भी पूरा करेंगे । वहीं बीजेपी जिला अध्यक्ष राजीव खंडेलवाल ने भी बताया कि इस तरह के हैशटेक से देवास का नाम देश भर में शीर्ष पर पहुंचा है और देवास के युवाओं और आम लोगों की अपील पर ट्विटर पर दूसरे नंबर पर यह ट्वीट ट्रेंडिंग हुआ ।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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