डबरा: मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले की तहसील डबरा में सीवर प्रोजेक्ट पर लापरवाही के आरोप लगाते हुये नगर पालिका के पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों ने डबरा में 88 करोड़ रुपये की लागत से चल रहे सीवर प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य की गुणवत्ता, अधूरे काम और अधिकारियों की निगरानी पर गंभीर सवाल उठाये हैं।
इस दौरान, पार्षदों ने चेतावनी भी दी है कि अगर समय रहते कार्यों में सुधार नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे और साथ ही सीवर लाइन का काम शहर में आगे नहीं बढ़ते देंगे। पार्षदों ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपनी बात रखी।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, डबरा शहर में सीवर लाइन बिछाने का काम लंबे समय से सवालों के घेरे में है। इससे पहले भी सीवर लाइन बिछाने के काम में लापरवाही की शिकायतों के बाद नगर पालिका द्वारा संबंधित ठेकेदार पर 17 लाख रुपये का जुर्माना लगाये जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बावजूद पार्षदों का आरोप है कि कामकाज में अब तक अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
बता दे कि इस मामले पर पार्षदों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। पार्षद हैप्पी सिंह सरदार ने नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों पर मनमानी के आरोप लगाये हैं। उन्होंने कहा कि वार्ड नंबर 12 समेत जहां-जहां सीवर लाइन बिछाई गई है अन्य वार्डों में, वहीं सड़कों की स्थिति बहुत ही खराब हो गई हैं। पार्षद ने कहा कि काम करने के बाद ठेकेदार सड़क को ऐसे ही अधूरी छोड़कर आगे बढ़ता जा रहा है।
पार्षदों का कहना है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के बावजूद निर्माण कार्य की निगरानी और निरीक्षण में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। उनका आरोप है कि काम पूरा होने के बाद यदि जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो उसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है।
सीवर प्रोजेक्ट की प्रगति और निगरानी व्यवस्था पर उठाये सवाल
पार्षद ने आरोप लगाया कि.. उन्हें सीवर प्रोजेक्ट की प्रगति, कार्यस्थलों और संबंधित इंजीनियरों की निगरानी व्यवस्था के बारे में भी पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती। उन्होंने पाइपों की गुणवत्ता और जगह-जगह काम अधूरा छोड़कर आगे बढ़ने के तरीके पर भी सवाल उठाये हैं। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में ऐसी लापरवाही से भविष्य में आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हैप्पी सिंह सरदार ने चेतावनी दी कि यदि सीवर प्रोजेक्ट का काम इसी तरह चलता रहा, तो वे शहर में आगे काम नहीं होने देंगे और इसके विरोध में आंदोलन करेंगे। अब सवाल यह है कि 88 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को लेकर उठ रही शिकायतों की जांच कब होगी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय की जाएगी?
डबरा से अरुण रजक की रिपोर्ट
