मानव कल्याण के लिए समर्पित संत दादा गुरु के निराहार रहने का संकल्प आज 21 सौ दिन पूर्ण कर चुका है। विगत 21 सौ दिनों से वे मात्र एक वक्त नर्मदा जल का पान कर रहे हैं, जो संपूर्ण विश्व के लिए आश्चर्य का विषय बना हुआ है। यह असाधारण साधना दमोह जिले के लिए एक यादगार दिवस के रूप में प्रतिष्ठित हुई, जब उनके संकल्प का 21 सौवां दिवस जरारू धाम गौ अभ्यारण्य में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
दमोह जिले के प्रसिद्ध जरारू धाम गौ अभ्यारण्य में हजारों गौ वंश के मध्य 21 सौ पौधों का रोपण कर इस पुण्य दिवस को अविस्मरणीय बनाया गया। इस अवसर पर प्रदेश के पंचायत एवं श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल सहित अनेक जनप्रतिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस वृहद वृक्षारोपण अभियान में सहभागिता की, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। इसी पवित्र गौ अभ्यारण्य में इस शुभ दिवस पर एक रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। दादा गुरु के अनुयायियों तथा श्रद्धालुओं ने मानव सेवा के इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने लोगों को जीवन दान देने के उद्देश्य से रक्तदान किया, जो सेवाभाव का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
दादा गुरु ने सत्संग में मानव कल्याण और सेवा के मार्ग पर चलने का दिया संदेश
अभ्यारण्य में आयोजित सत्संग के दौरान दादा गुरु ने मानव कल्याण हेतु सदमार्ग पर चलने का उपदेश दिया। उनके वचनों ने उपस्थित जनसमूह को धर्म और सेवा के प्रति प्रेरित किया, जिससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। इस संपूर्ण आयोजन के सूत्रधार प्रदेश के पंचायत एवं श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने इस दिवस को ‘सौभाग्यशाली’ बताया। उन्होंने उद्घोष किया कि यह दिन दमोह के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होगा। मंत्री पटेल ने दादा गुरु के अटूट संकल्प और उनके सेवा कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नई पहल
स्मरण रहे, गत वर्ष भी इसी गौ अभ्यारण्य में दादा गुरु के निराहार रहते हुए 1705 दिन पूर्ण होने पर उनकी पावन उपस्थिति में 1705 पौधों का रोपण किया गया था। यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि वे सभी पौधे आज भी जीवंत हैं और हरित पर्यावरण के प्रतीक बने हुए हैं। मंत्री पटेल ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि आज से ही जरारू धाम में जैविक खाद की एक विशाल इकाई का शुभारंभ हो रहा है। यह इकाई प्रदेश से डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) जैसे रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव को समाप्त करने में अत्यंत कारगर सिद्ध होगी। यह पहल कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वृक्षारोपण और रक्तदान से आगे बढ़ा आयोजन
यह आयोजन मात्र वृक्षारोपण अथवा रक्तदान तक सीमित नहीं रहा, अपितु यह दादा गुरु के अटूट संकल्प, पर्यावरण प्रेम और मानव सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया। दमोह की धरा पर घटित यह घटना आध्यात्मिक जागृति और सामाजिक उत्तरदायित्व का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है। दादा गुरु का यह निराहार व्रत और उसके उपलक्ष्य में आयोजित ये कल्याणकारी कार्य समाज को एक नई दिशा प्रदान कर रहे हैं, जहाँ प्रकृति और मानव का सह-अस्तित्व सुनिश्चित होता है। इस प्रकार, दमोह जिले ने एक बार फिर अध्यात्म और सेवा की अनुपम परंपरा का निर्वहन किया है। यह समूचा आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनचेतना जागृत करने में सफल रहा।





