दमोह-जबलपुर स्टेट हाईवे पर जिस लूट की वारदात ने पुलिस से लेकर आम जनता तक की नींद उड़ा दी थी, उसका मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि खुद फरियादी कलेक्शन एजेंट ही निकला। उसने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर माइक्रो फाइनेंस कंपनी के एक लाख तीस हजार रुपये हड़पने के लिए यह पूरी साजिश रची थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महज कुछ ही समय में इस झूठी लूट की कहानी का भंडाफोड़ कर दिया और आरोपी एजेंट समेत उसके दोनों दोस्तों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
दरअसल, बीते सात तारीख को दमोह-जबलपुर स्टेट हाईवे पर बायपास के पास हुई इस कथित लूट की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। इस व्यस्ततम माने जाने वाले स्टेट हाईवे पर चौबीसों घंटे वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में इतनी व्यस्त जगह पर दिनदहाड़े लूट की खबर से लोगों का चिंता में आना स्वाभाविक था। इस मामले को लेकर सागर जिले के सुरखी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पिपरिया निवासी घनश्याम अहिरवाल ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घनश्याम ने खुद को एक माइक्रो फाइनेंस कंपनी का कलेक्शन एजेंट बताया था। उसने पुलिस को दी शिकायत में कहा था कि वह क्षेत्र से कलेक्शन के पैसे लेकर वापस लौट रहा था, तभी स्टेट हाईवे पर दो अज्ञात बदमाशों ने उसे रोक लिया और उसके पास रखे एक लाख तीस हजार रुपये लूटकर फरार हो गए।
लूट की सूचना मिलते ही पुलिस ने शुरू की जांच
इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल तमाम पुलिस टीमों को सक्रिय किया और विशेष रूप से साइबर सेल को इस गुत्थी को सुलझाने के काम में लगाया। पुलिस की टीमों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच-पड़ताल शुरू की। जब पुलिस ने फरियादी घनश्याम अहिरवाल से घटना के संबंध में पूछताछ की, तो उसकी बताई कहानी ने पुलिस के मन में संदेह पैदा कर दिया। घनश्याम ने बताया था कि आरोपियों ने उसके साथ किसी भी तरह की मारपीट या जबरदस्ती नहीं की, बल्कि केवल बहला-फुसलाकर उससे पैसे लूट लिए।
बिना मारपीट लूट की कहानी पर पुलिस को हुआ शक
व्यस्त हाईवे पर बिना किसी जोर-जबरदस्ती या मारपीट के इतनी बड़ी रकम की लूट की बात पुलिस के गले नहीं उतरी। पुलिस को घनश्याम की इस अजीबोगरीब कहानी पर यकीन नहीं हुआ। इसके बाद साइबर सेल की टीम ने वैज्ञानिक तरीके से जांच आगे बढ़ाई और फरियादी घनश्याम के मोबाइल फोन को ट्रैक करना शुरू किया। जब उसके मोबाइल की कॉल डिटेल्स और लोकेशन की बारीकी से जांच की गई, तो कुछ संदेहास्पद तथ्य सामने आए। इसके आधार पर पुलिस ने घनश्याम के ही गांव पिपरिया के दो युवकों को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया।
पुलिस पूछताछ में हुआ घटना का खुलासा
पुलिस ने जब इन दोनों संदिग्धों से कड़ाई से पूछताछ की, तो वे ज्यादा देर तक झूठ नहीं बोल पाए और उन्होंने लूट की वारदात को अंजाम देना स्वीकार कर लिया। लेकिन जब उन्होंने इस पूरी घटना के पीछे की असलियत बयां की, तो पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह कोई वास्तविक लूट नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड खुद फरियादी घनश्याम अहिरवाल ही था। उसने अपने इन दोनों दोस्तों के साथ मिलकर फर्जी लूट का यह पूरा ड्रामा रचा था।
मास्टरमाइंड घनश्याम का इरादा माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कलेक्शन के एक लाख तीस हजार रुपये खुद हजम करने का था। वह कंपनी को दिखाना चाहता था कि रास्ते में उसके साथ लूट हो गई है ताकि उसे यह पैसे न चुकाने पड़ें। लेकिन उसकी यह चालाकी काम नहीं आई और पुलिस की पैनी नजरों ने उसके इस फर्जी प्लान को पूरी तरह फेल कर दिया। दमोह की देहात थाना पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मास्टरमाइंड घनश्याम अहिरवाल सहित उसके दोनों दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। मामले की पुष्टि करते हुए दमोह के एडिशनल एसपी सुजीत भदौरिया ने बताया कि पुलिस की सतर्कता और साइबर सेल की सक्रियता से इस फर्जी लूट की वारदात का पर्दाफाश हुआ है और तीनों आरोपी अब सलाखों के पीछे हैं।





