गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देने की मांग अब जन आंदोलन का रूप ले रही है। इसी कड़ी में दमोह जिले से एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है, जहां पांच लाख से अधिक नागरिकों ने इस मांग के समर्थन में अपनी सहमति दर्ज कराई है। यह विशाल जनमत संग्रह देश भर में चलाए जा रहे गौ सम्मान आह्वान अभियान का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे दमोह में भी खासा उत्साह मिला है।
पिछले महीने भर से जिले भर में गौ सेवक लगातार इस अभियान को चला रहे थे। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक, हर वर्ग के लोगों तक पहुंचकर गौ सेवकों ने इस महत्वपूर्ण विषय पर जनमत संग्रह किया। इस दौरान लोगों में गौ माता के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। गौ सेवकों ने घर-घर जाकर, चौपालों में बैठकर और सार्वजनिक स्थानों पर स्टॉल लगाकर लोगों को इस अभियान से जोड़ा। उन्होंने गौ माता के महत्व, भारतीय संस्कृति में उनकी भूमिका और अर्थव्यवस्था में उनके योगदान पर प्रकाश डाला, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोग इस मांग के समर्थन में आगे आए और अपने हस्ताक्षर किए।
‘गौ माता को राष्ट्र माता’ बनाने की मांग तेज
सोमवार को, गौ सेवकों का यह अथक प्रयास एक विशाल प्रदर्शन में बदल गया। जिला मुख्यालय पर बड़ी संख्या में गौ सेवक इकट्ठा हुए। उनके हाथों में गौ माता के सम्मान में नारे लिखे बैनर और तख्तियां थीं। ‘गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करो’ और ‘जय गौ माता’ जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। एक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्टर कार्यालय तक पहुंची। रैली में शामिल लोगों की संख्या इतनी अधिक थी कि शहर के मुख्य मार्ग कुछ देर के लिए थम से गए। यह जन सैलाब गौ माता के प्रति अगाध श्रद्धा और उनकी सुरक्षा व सम्मान की तीव्र इच्छा को दर्शाता था।
प्रशासन को सौंपा 5 लाख से अधिक हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन
कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर गौ सेवकों ने प्रशासन को हस्ताक्षरों से भरा ज्ञापन सौंपा। ये ज्ञापन केवल कागज़ के टुकड़े नहीं थे, बल्कि दमोह जिले के पांच लाख से अधिक नागरिकों की भावनाओं और उनकी गहरी आस्था का प्रतीक थे। इन हस्ताक्षरों के माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार से यह अपील की है कि गाय को तत्काल राष्ट्र माता का दर्जा प्रदान किया जाए।
इस अवसर पर, गौ सेवक दीपक नेमा ने बताया कि यह अभियान केवल दमोह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशव्यापी गौ सम्मान आह्वान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गौ माता हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उन्हें राष्ट्र माता घोषित करना समय की मांग है। नेमा ने यह भी कहा कि इस मांग को पूरा होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
गौ माता का संरक्षण और संवर्धन हमारा नैतिक कर्तव्य
एक अन्य गौ सेवक, गरिमा त्रिपाठी ने इस बात पर जोर दिया कि गौ माता का संरक्षण और संवर्धन हम सभी का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि इन पांच लाख हस्ताक्षरों से यह स्पष्ट हो गया है कि दमोह की जनता इस मांग को लेकर कितनी गंभीर और एकजुट है। त्रिपाठी ने कहा कि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिलने से उनके संरक्षण के प्रयासों को और बल मिलेगा।
प्रशासन ने स्वीकार किया ज्ञापन
इस पूरे आयोजन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद रहा। थाना प्रभारी कोतवाली दमोह, मनीष कुमार ने बताया कि रैली शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने गौ सेवकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनके ज्ञापन को स्वीकार किया है और उसे उचित माध्यम से आगे प्रेषित किया जाएगा। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि कहीं भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई।
गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने की यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। विभिन्न संगठनों और गौ सेवकों द्वारा देश के कोने-कोने में ऐसे अभियान चलाए जा रहे हैं। दमोह की यह पहल इस आंदोलन को और मजबूती प्रदान करेगी। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस विशाल जन भावना पर क्या निर्णय लेती है और गौ माता को उनका अपेक्षित सम्मान कब तक प्राप्त होता है।





