किराया मांगने के लिये बनाया दबाव तो होगी कार्रवाई, प्रशासन ने किराएदारों को दी राहत

किराया मांगने के लिये बनाया दबाव तो होगी कार्रवाई, प्रशासन ने किराएदारों को दी राहत

दतिया/सत्येन्द्र सिंह रावत

कोरोना वायरस को लेकर लगे लॉक डाउन को दो महीने से ज्यादा गुजर गए और अभी कब तक लॉक डाउन रहना है कुछ नहीं कहा जा सकता है। ऐसे समय में किराए से रह रहे परिवारों और किराए से दुकान चला रहे लोगों के सामने किराया देने का संकट खड़ा हो गया है। दो महीने से हाथ पर हाथ धरे बैठे लोगों को कई मकान मालिक घर से बेघर कर रहे हैं। कई दुकानों को हाल ही में दुकान खोलने की अनुमति मिली है, नाई की दुकानों को सबसे अंत मे खुलने की अनुमति मिली और इसे महज एक सप्ताह भी नहीं गुजरा है। अब ऐसे में सवाल ये है कि वो पहले अपनी उधारी चुकाएं या फिर किराया भरें।

इस स्थिति को लेकर अब इन्हें जिला प्रशासन से ही उम्मीद है। दतिया एसडीएम अशोक सिंह चौहान ने कहा है कि बताते हैं कि अगर कोई मकान अथवा दुकान मालिक किराया मांगने के लिए किराएदार पर दबाव बनाता है तो किरायेदार अपने क्षेत्र के संबंधित थाने में या फिर एसडीएम को आवेदन दे सकता है। आवेदन के बाद संबंधित मकान और दुकान मालिक पर कार्यवाही होगी। अगर मालिक किराया ना देने पर दुकान या मकान खाली करवाने के लिए कहता है तो भी कार्यवाही होगी। प्रशासन का कहना है कि संकट की घड़ी में अच्छे नागरिक की तरह हमें एक दूसरे की मदद करना चाहिए न कि आर्थिक संकट से गुजर रहे लोगों पर दबाव बनाना चाहिए।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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