मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक शहर दतिया स्थित मां पीतांबरा पीठ मंदिर से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। यहां बीते मंगलवार को वीआईपी दर्शन के दौरान अयोध्या श्रीराम मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य महंत राजकुमार दास के साथ कुछ लोगों की तीखी बहस हो गई। इस घटना के बाद मंदिर परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और मामला तूल पकड़ गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शांति भंग करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ, मंदिर ट्रस्ट के मुख्य प्रबंधक ने इस पूरी घटना पर गहरा दुख जताते हुए महंत से क्षमा मांगी है। इस घटना के बाद से मंदिर में आने वाले वीआईपी मेहमानों की सुरक्षा और प्रवेश व्यवस्था को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
परिचय देते ही शुरू हुई बहस, राम मंदिर के चंदे का हुआ जिक्र
जब महंत राजकुमार दास मां धूमावती के मंदिर में दर्शन करने पहुंचे, तो उन्होंने वहां मौजूद लोगों को अपना परिचय अयोध्या श्रीराम मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य के रूप में दिया। उनके परिचय देते ही वहां खड़े कुछ श्रद्धालुओं ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चंदे के पैसों को लेकर आपस में चर्चा और तीखी टिप्पणी शुरू कर दी। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस छिड़ गई, जिसे देखकर महंत ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे अपना अपमान बताया।
पुलिस ने खंगाले सीसीटीवी फुटेज
विवाद बढ़ने की सूचना मिलते ही पुलिस और मंदिर के कर्मचारी फौरन मौके पर पहुंच गए। स्थिति को संभालते हुए पुलिस ने मंदिर परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच शुरू कर दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शांति भंग करने के आरोप में एक व्यक्ति को पकड़कर जेल भेज दिया है और बाकी लोगों की पहचान की जा रही है।
बिना लिखित सूचना के वीआईपी प्रवेश पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस पूरी घटना के सामने आने के बाद मंदिर में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीतांबरा पीठ ट्रस्ट के मुख्य प्रबंधक डॉ. चंद्र मोहन मिश्रा ने बताया कि महंत राजकुमार दास के आने की कोई भी पूर्व लिखित सूचना मंदिर कार्यालय को नहीं दी गई थी। इस तरह की घटनाओं से यह बात सामने आ रही है कि वीआईपी अतिथियों के आने पर सुरक्षा और सूचना के नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।






