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गुफा के भीतर विराजते हैं महादेव, यहां हर साल बढ़ता है शिवलिंग का आकार

Written by:Bhawna Choubey
Published:
मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित गुप्तेश्वर मंदिर अपनी रहस्यमयी गुफा, सिंदूर चढ़ाने की अनोखी परंपरा और समय के साथ बढ़ते शिवलिंग के कारण भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।
गुफा के भीतर विराजते हैं महादेव, यहां हर साल बढ़ता है शिवलिंग का आकार

हम जब भी महाशिवरात्रि के अवसर पर देशभर के प्रसिद्ध शिव मंदिरों की चर्चा करते हैं, तो कुछ ऐसे स्थान सामने आते हैं जिनके बारे में जानकर मन श्रद्धा से भर जाता है। ऐसा ही एक अद्भुत और रहस्यमयी मंदिर मध्यप्रदेश में मौजूद है, जहां भक्त सिर्फ पूजा करने नहीं बल्कि एक चमत्कार को महसूस करने पहुंचते हैं।

हम बात कर रहे हैं दतिया जिले के उस प्राचीन गुफा मंदिर की, जहां महादेव स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान माने जाते हैं। यहां की सबसे अनोखी परंपरा है शिवलिंग पर सिंदूर चढ़ाना और स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां का शिवलिंग हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि यह मंदिर रहस्य और आस्था का संगम बन चुका है।

मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित गुफा का चमत्कार

दतिया जिले के बड़ौनी क्षेत्र की पहाड़ियों में स्थित यह प्राचीन गुफा मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां पहुंचते ही भक्तों को एक अलग तरह की शांति महसूस होती है। पहाड़ी के भीतर प्राकृतिक रूप से बनी गुफा में शिवलिंग स्थापित है, जिसे लोग स्वयंभू रूप मानते हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने कभी इस स्थान को गुप्त निवास के रूप में अपनाया था। इसी वजह से इस स्थान को गुप्तेश्वर नाम मिला। गुफा के अंदर वातावरण ठंडा और शांत रहता है, जिससे भक्तों को ध्यान और भक्ति में आसानी होती है।

शिवलिंग के बढ़ने की मान्यता और भक्तों का अटूट विश्वास

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यहां स्थित शिवलिंग को लेकर है। स्थानीय लोगों और वर्षों से दर्शन करने आ रहे श्रद्धालुओं का मानना है कि शिवलिंग का आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कई बुजुर्ग भक्त बताते हैं कि दशकों पहले शिवलिंग का आकार छोटा था, जो अब पहले से बड़ा दिखाई देता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से इसे प्राकृतिक बदलाव या चट्टानों की संरचना से जोड़ा जा सकता है, लेकिन भक्तों के लिए यह भगवान शिव का चमत्कार है। यही कारण है कि हर साल यहां आने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है।

गुफा के भीतर शिवलिंग के दर्शन करना आसान नहीं होता, क्योंकि अंदर का रास्ता संकरा है। फिर भी भक्त लंबी यात्रा और चढ़ाई पार कर यहां पहुंचते हैं। लोगों का कहना है कि यहां दर्शन करने के बाद मन को शांति और सुकून मिलता है।

सिंदूर चढ़ाने की अनोखी परंपरा, जो बहुत कम शिव मंदिरों में दिखती है

आमतौर पर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाया जाता है। लेकिन इस मंदिर की परंपरा थोड़ी अलग है। यहां शिवलिंग पर सिंदूर चढ़ाने की परंपरा भी प्रचलित है, जो बहुत कम शिव मंदिरों में देखने को मिलती है।

इस परंपरा की तुलना अक्सर उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर से भी की जाती है, जहां विशेष अवसरों पर अलग तरह की पूजा परंपराएं देखने को मिलती हैं। भक्त मानते हैं कि सिंदूर अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी कारण दूर-दूर से लोग यहां अपनी इच्छा लेकर आते हैं और पूरी होने पर फिर से धन्यवाद देने पहुंचते हैं।

मंदिर तक पहुंचने का रोमांचक रास्ता भी बनाता है यात्रा को खास

इस मंदिर की यात्रा आसान नहीं, लेकिन बेहद खूबसूरत है। पहाड़ी के नीचे से मुख्य गुफा तक पहुंचने के लिए करीब दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। रास्ते में हरियाली, चट्टानें और प्राकृतिक दृश्य मन मोह लेते हैं।

गुफा तक पहुंचने के लिए करीब 400 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। कई भक्त इसे भक्ति का हिस्सा मानते हैं और पूरी श्रद्धा से चढ़ाई करते हैं। रास्ते में पड़ने वाली झील और पहाड़ी दृश्य थकान को कम कर देते हैं।

महाशिवरात्रि पर उमड़ता है आस्था का सैलाब

वैसे तो पूरे साल यहां भक्त आते रहते हैं, लेकिन महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में भारी भीड़ उमड़ती है। हजारों श्रद्धालु रातभर पूजा-अर्चना और भजन में शामिल होते हैं।

स्थानीय प्रशासन भी इस दौरान व्यवस्था मजबूत करता है ताकि दूर-दूर से आने वाले लोगों को कोई परेशानी न हो। श्रद्धालु मानते हैं कि इस दिन यहां दर्शन करना विशेष फल देता है। इस दौरान आसपास का पूरा इलाका भक्ति के रंग में रंग जाता है और गुफा मंदिर की महिमा देखने लायक होती है।

 

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