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हिमाचल प्रदेश सिरमौर में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल जारी, न्यूनतम वेतन और कोर्ट आदेश लागू करने की मांग

Written by:Rishabh Namdev
Published:
सिरमौर जिले में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय नाहन में DC कार्यालय के सामने पांच दिन से हड़ताल पर बैठे हुए हैं। CITU के बैनर तले चल रही इस हड़ताल में कर्मचारी कोर्ट द्वारा निर्धारित 20 हजार रुपये न्यूनतम वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश सिरमौर में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल जारी, न्यूनतम वेतन और कोर्ट आदेश लागू करने की मांग

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर संकट में हैं। जिला मुख्यालय नाहन में DC कार्यालय के बाहर 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी CITU के बैनर तले पांचवें दिन भी धरने पर बैठे हुए हैं। कर्मचारियों की यह सामूहिक हड़ताल आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित कर रही है।

हड़ताल में शामिल कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और कंपनी प्रबंधन की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली तो आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल सकता है। CITU वर्कर्स यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष सुनील दत ने कहा कि एंबुलेंस कर्मचारियों को अपनी जायज मांगों के लिए बार-बार हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।

“कर्मचारियों की मांगों को लेकर न तो सरकार और न ही कंपनी प्रबंधन गंभीर है। जिससे कर्मचारियों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।” — सुनील दत, प्रदेश अध्यक्ष, CITU वर्कर्स यूनियन

न्यायालय के आदेशों की अनदेखी

कर्मचारियों की मुख्य मांग उच्च न्यायालय और लेबर कोर्ट द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन से जुड़ी है। वर्कर्स यूनियन के जिला अध्यक्ष सुरजीत ने बताया कि कोर्ट ने 8 घंटे के काम के लिए 20,000 रुपये वेतन निर्धारित किया है, लेकिन कंपनी द्वारा 12 घंटे का काम करवाने के बावजूद मात्र 11,700 रुपये दिए जा रहे हैं।

सुनील दत ने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद कर्मचारियों को निर्धारित वेतन नहीं मिल रहा है और उनका सीधे तौर पर शोषण हो रहा है। कर्मचारी कोर्ट के आदेश अनुसार वेतन देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

अवकाश पर वेतन कटौती का आरोप

यूनियन नेताओं ने बताया कि कंपनी प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों को अवकाश देने से भी मना किया जाता है। यदि कोई कर्मचारी छुट्टी लेता है तो उसके वेतन में कटौती कर दी जाती है। यह व्यवस्था श्रम कानूनों के खिलाफ है और कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

कंपनी द्वारा 8 घंटे के बजाय 12 घंटे का काम करवाया जा रहा है, जो श्रम नियमों के विपरीत है। इसके बावजूद निर्धारित वेतन का आधा से भी कम भुगतान किया जा रहा है, जिसे कर्मचारी न्याय संगत नहीं मानते।

अनुभवहीन कर्मचारियों से खतरे में जान

हड़ताल के दौरान एक गंभीर मुद्दा सामने आया है। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन ने हड़ताल के बाद ऐसे कर्मचारियों को 102 और 108 एंबुलेंस में तैनात कर दिया है जिनके पास किसी प्रकार का कोई अनुभव नहीं है। यह मरीजों की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।

प्रदेश अध्यक्ष सुनील दत ने चेतावनी देते हुए कहा कि अनुभवहीन लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में लगाना खतरनाक है। इससे मरीजों की स्थिति बिगड़ सकती है और गंभीर हादसे हो सकते हैं।

सिरमौर जिले में स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने से आम जनता को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारी संगठनों ने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन से जल्द बातचीत की मांग की है, अन्यथा आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है।

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