हिमाचल प्रदेश के सामने गहराते वित्तीय संकट पर चर्चा के लिए शुक्रवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद करने के मुद्दे पर बुलाई गई इस बैठक से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक बीच में ही वॉकआउट कर गए। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बैठक के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए प्रदेश का हित नहीं, बल्कि कुर्सी का हित सर्वोपरि है। सीएम ने आरोप लगाया कि भाजपा हिमाचल के अधिकारों की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखने से डर रही है।
सीएम का आरोप- राजनीतिक रोटियां सेंक रही भाजपा
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि यह बैठक भाजपा के कहने पर ही सचिवालय की जगह पीटरहॉफ में बुलाई गई थी, लेकिन वे हमारी बात सुनने से पहले ही उठकर चले गए। उन्होंने कहा कि यह साफ है कि भाजपा इस गंभीर मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेंक रही है।
“केंद्र सरकार ने RDG बंद की है। इस डर से हिमाचल भाजपा में RDG बहाल करने की मांग पीएम मोदी के सामने रखने की हिम्मत नहीं है। भाजपा अपने अधिकारों से पीछे हट रही है।” — सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री
सीएम ने स्पष्ट किया कि चाहे भाजपा साथ दे या न दे, कांग्रेस सरकार हिमाचल के हक की लड़ाई हर स्तर पर लड़ेगी। इस दौरान कांग्रेस विधायक कुलदीप राठौर ने भी सवाल उठाया कि भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह RDG बहाली के पक्ष में है या विरोध में।
सरकार के तथ्य भ्रामक: जयराम ठाकुर
वहीं, बैठक से वॉकआउट करने के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वित्त सचिव द्वारा दी गई प्रेजेंटेशन में कई तथ्य भ्रामक और गुमराह करने वाले थे।
“सीएम ने पहले दिन से ही मिलकर काम करने का माहौल नहीं बनाया। 12वें, 13वें और 14वें वित्त आयोग ने ही RDG ग्रांट बंद करने के संकेत दे दिए थे। ऐसे में सरकार को अपने खर्चे नियंत्रित करने चाहिए थे और आय बढ़ानी चाहिए थी।” — जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
जयराम ठाकुर ने कहा कि RDG केवल हिमाचल का नहीं, बल्कि 17 राज्यों का बंद हुआ है, इसलिए भेदभाव के आरोप पूरी तरह गलत हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने भी कहा कि कांग्रेस सरकार अपनी गारंटियों के दबाव में वित्तीय संकट का रोना रो रही है और अपनी विफलताओं का ठीकरा केंद्र पर फोड़ रही है।
क्या है RDG और हिमाचल पर इसका असर?
राजस्व घाटा अनुदान (RDG) केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को उनके राजस्व और खर्च के बीच के अंतर को पाटने के लिए दिया जाता है। 16वें वित्त आयोग ने इसे बंद करने की सिफारिश की, जिसे केंद्र ने मान लिया है। यह हिमाचल के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि RDG राज्य के कुल बजट का लगभग 13% हिस्सा था। पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां आय के साधन सीमित हैं।
आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 2022 के बीच हिमाचल को RDG के रूप में लगभग 54 हजार करोड़ रुपए मिले थे। अगले पांच वर्षों में भी 45 से 50 हजार करोड़ मिलने की उम्मीद थी, जो अब नहीं मिलेगी। राज्य पर पहले से ही 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। वित्त सचिव देवेश कुमार के अनुसार, अगर अगले वित्तीय वर्ष में विकास कार्य और सब्सिडी बंद भी कर दी जाए, तब भी खर्च (48 हजार करोड़) आय (42 हजार करोड़) से अधिक रहेगा।
माकपा नेता राकेश सिंघा ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि यह राजनीतिक स्कोर करने का नहीं, बल्कि मिलकर चलने का समय है। उन्होंने कहा कि अगर RDG छिन गई तो इसे बहाल करना बहुत मुश्किल होगा और हिमाचल को गंभीर आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।





