लखनऊ: लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की सियासत में वोटर लिस्ट को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर चुनाव आयोग के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर कहा कि भाजपा ने एक बड़ी कंपनी को इस काम के लिए लगाया है जो सुनियोजित तरीके से वोटरों के नाम, खासकर मुस्लिम समुदाय के लोगों के नाम, लिस्ट से हटा रही है। उन्होंने इस प्रक्रिया में फॉर्म 7 के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए।
फॉर्म 7 की जरूरत पर उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने तर्क दिया कि जब मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) पूरा हो चुका है, तो फिर नाम काटने के लिए फॉर्म 7 क्यों स्वीकार किया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा।
“जब SIR हो रहा है, SIR हो चुका है, रिवीजन हो चुका है, तो फॉर्म 7 की क्या जरूरत है? जब हमने पूरी वोटर लिस्ट को रिवाइज कर दिया है, तो वोट काटने के लिए फॉर्म 7 क्यों ले रहे हैं?”- अखिलेश यादव
उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, और यह उसकी ज़िम्मेदारी है कि ज़्यादा से ज़्यादा वोट बने। किसी का वोट न छूटे, किसी का वोट न कटे, लेकिन भाजपा ने एक बड़ी कंपनी को काम पर रखा है और वह कंपनी चुनाव आयोग के साथ मिलकर वोट काट रही है।”
‘दशरथ’ और ‘नंदलाल’ का किया जिक्र
अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए अखिलेश यादव ने दो लोगों, दशरथ और नंदलाल, का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया कि ‘दशरथ’ नाम के व्यक्ति के हस्ताक्षर से सबसे ज्यादा वोट काटे गए और जांच में यह बात सामने आई कि ये सभी वोट मुस्लिम समुदाय के थे।
उन्होंने कहा, “मैं द्वापर और त्रेता के महापुरुषों को धन्यवाद देना चाहता हूं जिनकी कृपा हम पर हुई, और नंदलाल और दशरथ पकड़े गए।” अखिलेश यादव ने बताया कि नंदलाल एक मजदूर हैं जो अंगूठा लगाते हैं, लेकिन भाजपा ने उनके नाम से हस्ताक्षर कर दिए। उन्होंने इस मामले को उजागर करने के लिए बीएलओ (BLO) को भी धन्यवाद दिया।
बजट को बताया था ‘विदाई बजट’
यह कोई पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर हमला बोला हो। हाल ही में, उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को ‘विदाई बजट’ करार दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी और अपने प्रचार के माध्यम से जनता को गुमराह कर रही है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा प्रस्तुत नौ लाख 12 हजार करोड़ रुपए के बजट पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा था कि बड़े आकार के बावजूद इस बजट में गरीबों, किसानों और नौजवानों के लिए कुछ भी नहीं है।





