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यूपी विधानसभा में अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बोले सीएम योगी आदित्यनाथ, कहा – ‘कानून से ऊपर कोई नहीं, सपा पूजना चाहे तो पूजे’

Written by:Rishabh Namdev
Published:
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता। सीएम ने माघ मेले में हुई घटना को अनावश्यक रूप से मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।
यूपी विधानसभा में अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बोले सीएम योगी आदित्यनाथ, कहा – ‘कानून से ऊपर कोई नहीं, सपा पूजना चाहे तो पूजे’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून से बड़ा नहीं है, यहां तक कि वह खुद भी नहीं। सीएम योगी ने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र है, और हर कोई इस पदवी का इस्तेमाल नहीं कर सकता।

सीएम योगी ने माघ मेले की घटना का जिक्र करते हुए कहा, “माघ मेले में जो मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर मुद्दा बनाया गया। क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर पूरे प्रदेश में घूम जाएगा? नहीं… एक सिस्टम है, एक व्यवस्था है।” उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए बराबर है और भारत के हर नागरिक को इसका पालन करना चाहिए।

‘अगर सपा पूजना चाहती है तो पूजे’

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी को घेरते हुए कहा कि अगर वे (अविमुक्तेश्वरानंद) शंकराचार्य थे तो सपा सरकार ने वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज क्यों करवाया था और एफआईआर क्यों दर्ज की थी? योगी ने कहा, “अगर सपा के लोग उसे पूजना चाहते हैं तो पूजें। लेकिन हम लोग मर्यादित लोग हैं, कानून के शासन पर विश्वास करते हैं, कानून का शासन पालन करते हैं, और पालन करवाना भी जानते हैं।”

“भारत के सनातन धर्म में भी यही व्यवस्था है। सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है। हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। मैं भी नहीं।” — योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश

उन्होंने देश में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों का भी उल्लेख किया। योगी ने बताया कि जगद्गुरू शंकराचार्य ने देश के चार कोनों में चार मठों की स्थापना की थी: उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारका। हर पीठ की अपनी परंपरा और मर्यादा है, जिसका पालन सभी को करना चाहिए।

माघ मेले में क्या हुआ था?

यह पूरा विवाद 18 जनवरी को प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान के दिन शुरू हुआ था। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस ने उनसे पैदल जाने का अनुरोध किया, लेकिन उनके शिष्य पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे।

इसके बाद पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई और पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया। आरोप है कि एक साधु को चौकी में पीटा भी गया। इस घटना से नाराज शंकराचार्य धरने पर बैठ गए और बिना स्नान किए ही वाराणसी लौट आए। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह सब सरकार के इशारे पर हुआ है।

‘कालनेमि’ और ‘नकली हिंदू’ वाला विवाद

इस घटना के बाद सीएम योगी और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच तीखी बयानबाजी भी हुई थी। 22 जनवरी को हरियाणा में एक कार्यक्रम में योगी ने बिना नाम लिए कहा था कि कुछ ‘कालनेमि’ धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं।

इसके जवाब में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए योगी को ‘नकली हिंदू’ कहा था। उन्होंने कहा, “चोला तो साधु का है और गोहत्या हो रही है। अब आप बताइए कि कालनेमि कौन है?” उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार ने उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा था, जो उन्होंने दे दिया, लेकिन सरकार अपने असली हिंदू होने का प्रमाण नहीं दे पाई।

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