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MP के देवास में कलेक्टर कार्यालय से जारी हुए फर्जी आदेश, बाबू गिरफ्तार

Written by:Atul Saxena
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MP News : मध्य प्रदेश में जहां एक ओर सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है, वहीं देवास जिले के कलेक्टर कार्यालय में ही एक ऐसे बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की नींव हिला दी है। कलेक्टर के दफ्तर में बैठकर ही सरकारी बाबुओं और बाहरी लोगों ने मिलकर करोड़ों रुपये के फर्जी आदेश जारी कर दिए। इस सनसनीखेज घोटाले का भंडाफोड़ होने पर हर कोई हैरान है और अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई अन्य की तलाश जारी है।
MP के देवास में कलेक्टर कार्यालय से जारी हुए फर्जी आदेश, बाबू गिरफ्तार

कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देश पर हुई जांच में सामने आया कि कलेक्ट्रेट के कुछ बाबू अन्य बाहरी लोगों के साथ मिलकर कलेक्टर के नाम से फर्जी दस्तावेज जारी कर रहे थे। ये फर्जीवाड़ा इतना बड़ा था कि इसका सीधा असर आदिवासियों की जमीनों की खरीद-फरोख्त पर पड़ रहा था। दरअसल, आदिवासियों की जमीन बेचने के लिए कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य होती है, और आरोपी इसी नियम का फायदा उठाकर फर्जी आदेश जारी कर रहे थे। इस गोरखधंधे में एडीएम का रीडर संजीव जाटव, नजूल शाखा का बाबू रमेश लोबानिया, विजयागंज मंडी तहसील कार्यालय का बाबू जितेंद्र भद्रे और खातेगांव क्षेत्र का महेंद्र कुशवाह जैसे नाम सामने आए हैं। इन सभी ने मिलकर एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर रखा था, जो भोले-भाले लोगों को निशाना बनाकर फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था।

फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब संबंधित व्यक्ति आदिवासियों की जमीन की रजिस्ट्री कराने जिला पंजीयक कार्यालय पहुंचे। जिला पंजीयक को दस्तावेजों में कुछ गड़बड़ी की शंका हुई। उन्होंने तत्काल इस बात की जानकारी कलेक्टर ऋतुराज सिंह को दी। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए अपने स्तर पर जांच शुरू करवाई, जिसमें पूरे फर्जीवाड़े के खेल का पर्दाफाश हो गया। जांच में ऐसे करीब 13 प्रकरण सामने आए हैं, जिनमें आरोपियों ने फर्जी तरीके से कलेक्टर की अनुमति के आदेश जारी कर दिए थे। यह संख्या और भी बढ़ सकती है क्योंकि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

इस बड़े खुलासे के बाद कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने तत्काल प्रभाव से बीएनपी पुलिस को आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के लिए पत्र लिखा। कलेक्टर के आदेश पर बीएनपी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया। पुलिस ने इस मामले में अब तक एडीएम रीडर संजीव जाटव, नजूल शाखा के बाबू रमेश लोबानिया, विजयागंज मंडी तहसील कार्यालय के बाबू जितेंद्र भद्रे और महेंद्र कुशवाह को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह में दो से तीन और आरोपी शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है।

इस पूरे मामले पर देवास कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें उनके पद से तत्काल प्रभाव से पृथक किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी इस फर्जीवाड़े में संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, देवास एसपी पुनीत गेहलोद ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपियों से पूछताछ में कई और अहम खुलासे होने की उम्मीद है और इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं, जो जल्द ही बाकी आरोपियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाएंगी।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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