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देवास के इंटरनेशनल एथलीट देव मीणा से रेलवे स्टेशन पर बदसलूकी, पोल ले जाने पर वसूला गया जुर्माना

Written by:Bhawna Choubey
Published:
देश के लिए मेडल और रिकॉर्ड जीतने वाले देवास के इंटरनेशनल पोल वॉल्टर देव मीणा को महाराष्ट्र के पनवेल रेलवे स्टेशन पर अपमान झेलना पड़ा। खेल उपकरण साथ होने पर न सिर्फ जुर्माना वसूला गया, बल्कि व्यवहार ने सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर कर दी।
देवास के इंटरनेशनल एथलीट देव मीणा से रेलवे स्टेशन पर बदसलूकी, पोल ले जाने पर वसूला गया जुर्माना

हम अक्सर खिलाड़ियों की जीत पर गर्व करते हैं, उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं और उन्हें देश का गौरव बताते हैं। लेकिन जब वही खिलाड़ी अपनी मेहनत के औजार यानी खेल उपकरणों के साथ आम नागरिक की तरह सफर करता है, तब सिस्टम का असली चेहरा सामने आता है। ऐसा ही एक मामला देवास जिले के इंटरनेशनल एथलीट देव मीणा के साथ सामने आया है, जिसने खेल जगत को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

महाराष्ट्र के पनवेल रेलवे स्टेशन पर देव मीणा को जिस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा, वह सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि पूरे खेल तंत्र की पीड़ा को दिखाती है। देव हाल ही में कर्नाटक के मंगलुरु में आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर लौट रहे थे। उनके साथ पोल वॉल्ट का जरूरी उपकरण ‘पोल’ था, जो उनकी खेल यात्रा का अहम हिस्सा है। लेकिन यही पोल उनके लिए अपमान और मानसिक पीड़ा की वजह बन गया।

पनवेल स्टेशन पर क्या हुआ

देव मीणा जब पनवेल रेलवे स्टेशन पहुंचे, तो उनके पास पोल वॉल्ट का पोल मौजूद था, जिसकी लंबाई और बनावट सामान्य सामान से अलग होती है। रेलवे कर्मचारियों ने इस पोल को स्टेशन से बाहर ले जाने पर आपत्ति जताई और इसके बदले उनसे जुर्माना वसूला गया। देव का कहना है कि जुर्माना देना समस्या नहीं थी, बल्कि जिस तरीके से बात की गई और व्यवहार किया गया, वह बेहद अपमानजनक था।

देव मीणा ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक खिलाड़ी पहले ही ट्रेनिंग, चोट, यात्रा और संसाधनों की कमी से जूझता है। ऐसे में जब रेलवे जैसे सार्वजनिक संस्थान से सहयोग की उम्मीद होती है, वहां बदतमीजी का सामना करना मनोबल तोड़ देता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे खेल उपकरण ले जाने के लिए तय शुल्क देने को तैयार हैं, लेकिन सम्मानजनक व्यवहार हर नागरिक का अधिकार होना चाहिए।

सोशल मीडिया पर गुस्सा और खेल जगत की नाराजगी

पनवेल स्टेशन की यह घटना सामने आते ही सोशल मीडिया और खेल गलियारों में नाराजगी साफ दिखाई देने लगी। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर मेडल जीतकर लौटता है, तब उसका स्वागत किया जाता है, लेकिन जब वही खिलाड़ी अभ्यास और प्रतियोगिता के लिए जरूरी उपकरण लेकर सफर करता है, तो उसे परेशानी क्यों झेलनी पड़ती है।

खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों का कहना है कि पोल वॉल्ट जैसे खेलों में इस्तेमाल होने वाले उपकरण सामान्य बैग की तरह नहीं होते। फ्लाइट और ट्रेन, दोनों में इन्हें ले जाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। बावजूद इसके, पनवेल की घटना इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि यहां समस्या नियमों से ज्यादा व्यवहार को लेकर रही। यह केवल देव मीणा का अपमान नहीं, बल्कि उन हजारों युवा खिलाड़ियों के आत्मविश्वास पर चोट है, जो सीमित संसाधनों में देश का नाम रोशन करने का सपना देखते हैं।

रेल और खेल मंत्रालय से उठ रही ‘स्मूथ ट्रैवल पॉलिसी’ की मांग

इस घटना के बाद एक बार फिर यह मांग तेज हो गई है कि रेल मंत्रालय और खेल मंत्रालय मिलकर खिलाड़ियों के लिए एक स्पष्ट और संवेदनशील यात्रा नीति तैयार करें। पोल वॉल्ट के पोल जैसे उपकरण लंबे और नाजुक होते हैं, जिन्हें ले जाने के लिए विशेष अनुमति, सुरक्षित व्यवस्था और प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होती है।

खेल जगत का मानना है कि अगर देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन चाहिए, तो खिलाड़ियों की बुनियादी जरूरतों को समझना होगा। यात्रा के दौरान बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं न सिर्फ खिलाड़ियों को मानसिक रूप से थकाती हैं, बल्कि उनके प्रदर्शन पर भी असर डालती हैं। देव मीणा जैसे खिलाड़ी चाहते हैं कि भविष्य में किसी और को ऐसी स्थिति से न गुजरना पड़े, इसलिए नीति स्तर पर बदलाव जरूरी है।

देव मीणा की उपलब्धियां

देव मीणा कोई साधारण खिलाड़ी नहीं हैं। वे भारतीय एथलेटिक्स का उभरता हुआ सितारा हैं और उनके नाम कई बड़ी उपलब्धियां दर्ज हैं। वर्ष 2025 के राष्ट्रीय खेलों में देव मीणा ने 5.32 मीटर की ऐतिहासिक छलांग लगाकर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें गोल्ड मेडल मिला और उन्होंने शिवा सुब्रमण्यम का पुराना रिकॉर्ड तोड़ा।

इसके अलावा, दुबई में आयोजित 21वीं एशियाई जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप (अंडर-20) में देव मीणा ने कांस्य पदक जीतकर मध्य प्रदेश को पोल वॉल्ट में पहला अंतरराष्ट्रीय पदक दिलाया। उनकी प्रतिभा को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने क्यूबा के कोच एंजेल एडुआर्डो गार्सिया एस्टेबान को भोपाल बुलाकर देव की ट्रेनिंग की व्यवस्था की थी।

छोटे गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

मध्य प्रदेश के देवास जिले के छोटे से गांव सिल्फोड़खेड़ा से निकलकर देव मीणा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया है। सीमित संसाधनों, कड़ी मेहनत और लगातार संघर्ष के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। भुवनेश्वर में आयोजित 27वीं सीनियर नेशनल फेडरेशन चैंपियनशिप में 5.10 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीतना उनकी निरंतर प्रगति का उदाहरण है।

देव का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो छोटे शहरों और गांवों से बड़े सपने देखते हैं। लेकिन पनवेल स्टेशन की घटना यह भी दिखाती है कि सिस्टम अभी खिलाड़ियों की वास्तविक जरूरतों को समझने में पीछे है।