देवास टेकरी पर शुरु हुआ चांदी का कार्य, विधायक ने की समीक्षा

देवास टेकरी पर शुरु हुआ चांदी का कार्य, विधायक ने की समीक्षा

देवास/सोमेश उपाध्याय

देवास माता टेकरी पर 500 किलाे चांदी से माता मंदिराें में सिंहासन, द्वार और छत का काम हाेगा। मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा मंदिर में चांदी की कारीगरी के काम की शुरुआत हाे गई। देवस्थान प्रबंध समिति काे श्रद्धालुओं से दान में मिले चांदी के जेवराें का इस्तेमाल इस काम में किया जाएगा। देवास राजपरिवार की मुखिया व स्थानीय विधायक गायत्रीराजे पवार और उनके बेटे महाराज विक्रमसिंह पवार इस माैके पर टेकरी पहुंचे। चांदी के काम के लिए बड़ी संख्या में माता भक्त आगे आ रहे हैं। चांदी दान करने के लिए कार्यालय पर संपर्क कर रहे हैं। एसडीएम प्रदीप साेनी ने बताया 500 किलो चांदी का कार्य होगा। नवरात्रि के पहले बड़ी माता मंदिर में कार्य पूर्ण होना संभावित है। विधायक काे एसडीएम साेनी ने माता मंदिर पर चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी दी। नवरात्रि के पहले टेकरी पर हाेने वाले सौंदर्यीकरण समेत अन्य कार्याें से अवगत कराया।

होलकर व पंवार राजवंश की कुलदेवी है

ऐसी मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से कोई भी मुराद मांगी जाए वह पूरी होती है।देवास पहला ऐसा शहर है, जहाँ दो वंश राज करते थे- पहला होलकर राजवंश और दूसरा पँवार राजवंश। देवास स्थित टेकरी पर विराजमान माता तुलजा देवी और चामुंडा देवी, अपने वैभव और मराठी शासक होलकर तथा पंवार राजवंश की कुलदेवी के रूप में विख्यात है।बड़ी माँ तुलजा भवानी देवी होलकर वंश की कुलदेवी हैं और छोटी माँ चामुण्डा देवी पँवार वंश की कुलदेवी।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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